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सीमा पर खुद पहुंचती हैं मां कामाख्या!” गहमर धाम की अद्भुत आस्था - कहानी जानकर रह जाएंगे हैरान

Ghazipur News: गाजीपुर जिले के गहमर स्थित सिद्ध पीठ मां कामाख्या धाम में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होते ही श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा है। पहले ही दिन से मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। एशिया के सबसे बड़े फौजियों के गांव के रूप में पहचान रखने वाले गहमर में नवरात्रि का खास उत्साह नजर आ रहा है। दूसरे दिन भी मंदिर परिसर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं और यही सिलसिला पूरे नौ दिनों तक जारी रहने की संभावना है।

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मां कामाख्या को सिकरवार वंश की कुलदेवी माना जाता है, जिससे इस धाम का महत्व और भी बढ़ जाता है। नवरात्रि के दौरान यहां नौ दिनों तक नौ देवियों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। दूर-दूर से आए श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर मां के दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं।

गहमर गांव की पहचान सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि देश सेवा से भी जुड़ी है। यहां से बड़ी संख्या में युवा भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मां कामाख्या अपने भक्तों, खासकर सैनिकों की विशेष रक्षा करती हैं। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि लोगों का अटूट विश्वास है कि मां भगवती की कृपा से सैनिक युद्ध के दौरान सुरक्षित रहते हैं।

इस धाम से जुड़ी एक अनोखी परंपरा भी है। कहा जाता है कि जब भी कोई सैनिक छुट्टी पर घर आता है, तो सबसे पहले मां कामाख्या के दरबार में माथा टेकता है। वहीं, ड्यूटी पर लौटते समय भी मां का आशीर्वाद लेकर ही रवाना होता है। पुजारी के मुताबिक, मां भगवती अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं। यही विश्वास और आस्था श्रद्धालुओं को दूर-दराज से यहां खींच लाती है।

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