Mangala Gauri Vrat Katha : मां मंगला गौरी की पूजा से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ऐसा माना जाता है कि मंगला गौरी का व्रत करने से विवाह संबंधी समस्याएँ और वैवाहिक जीवन की बाधाएँ दूर हो सकती हैं। विशेष रूप से यदि किसी पर मंगल दोष हो, तो इस दिन की पूजा अत्यंत लाभकारी होती है। इसे पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख-शांति के लिए भी किया जाता है। मंगला गौरी का व्रत विवाह और वैवाहिक जीवन की सभी कठिनाइयों को दूर करने में सहायक माना जाता है।
मंगला गौरी की व्रत कथा - Mangala Gauri Vrat Katha
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, धर्मपाल नामक एक सेठ था। सेठ धर्मपाल के पास धन की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उन्हें संतान नहीं हुई थी। वह हमेशा यह सोचकर चिंतित रहता कि यदि उसकी संतान नहीं हुई तो उसका वारिस कौन होगा और उसके व्यापार की देखभाल कौन करेगा।
इसके बाद, गुरु के परामर्श अनुसार सेठ धर्मपाल ने माता पार्वती की श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना की। प्रसन्न होकर माता पार्वती ने उसे संतान प्राप्ति का वरदान दिया, लेकिन चेतावनी दी कि संतान अल्पायु होगी। कुछ समय बाद धर्मपाल की पत्नी ने एक पुत्र को जन्म दिया। इसके बाद धर्मपाल ने ज्योतिषी को बुलाकर पुत्र का नामकरण करवाया और माता पार्वती की भविष्यवाणी की सूचना दी। ज्योतिषी ने धर्मपाल को सुझाव दिया कि अपने पुत्र का विवाह उस कन्या से कराएँ जो मंगला गौरी व्रत करती हो, क्योंकि मंगला गौरी व्रत के पुण्य से पुत्र दीर्घायु और सुखी जीवन पाएगा।
यह व्रत महिलाएँ अपने सुहाग की लंबी उम्र और संतान प्राप्ति के लिए करती हैं। सेठ धर्मपाल ने अपने इकलौते पुत्र का विवाह मंगला गौरी व्रत करने वाली कन्या से करवा दिया। कन्या के पुण्य प्रभाव से धर्मपाल का पुत्र मृत्यु के भय से सुरक्षित हो गया। तभी से मां मंगला गौरी के व्रत की यह परंपरा चली आ रही है।
