वाराणसी के पास अगर आप सिर्फ घाट, मंदिर और गंगा आरती तक ही सीमित हैं, तो यकीन मानिए आप बहुत कुछ मिस कर रहे हैं। चंदौली ज़िले में मौजूद राजदरी, देवदरी और औरवाटांड़ जलप्रपात ऐसे ही छिपे हुए खजाने हैं, जिन्हें लोग अब धीरे-धीरे खोज रहे हैं। ये जगहें स्थानीय लोगों, BHU के छात्रों और ऑफबीट ट्रैवल पसंद करने वालों के बीच काफी लोकप्रिय हैं, लेकिन अब भी मुख्यधारा के टूरिज़्म मैप से लगभग बाहर हैं।
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| राजदरी-देवदरी और औरवाटांड़ झरनों का पूरा रोमांचक सच |
राजदरी-देवदरी झरने: नाम बड़े, दर्शन और भी बड़े
हैरानी की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय पहचान न होने के बावजूद, ये झरने भारत के सबसे भव्य और विशाल जलप्रपातों में गिने जा सकते हैं। हरे-भरे जंगलों के बीच चट्टानों से गिरता दूधिया पानी आंखों को सुकून और मन को ताजगी दे देता है। ये सिर्फ देखने की जगह नहीं, बल्कि महसूस करने का अनुभव हैं।
यह रिपोर्ट राजदरी-देवदरी झरनों के साथ-साथ औरवाटांड़ कैन्यन, नौगढ़ डैम और चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य की पूरी जानकारी देती है, जो लेखक के निजी यात्रा अनुभव पर आधारित है।
लेखक का अनुभव: जब यूपी में दिखा ‘अमेरिका का ग्रैंड कैन्यन’
लेखक का जन्म वाराणसी में हुआ और जीवन का बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में बीता। इसके बावजूद, उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि उनके अपने राज्य में इतना बीहड़, पहाड़ी और रोमांचक भू-दृश्य मौजूद है।
राजदरी, देवदरी और औरवाटांड़ - तीनों झरनों का नज़ारा सांसें रोक देने वाला है। ऊंची चट्टानें, गहरी घाटियां, कच्चा-पक्का रास्ता और तेज़ बहता पानी - यह सब देखकर बार-बार यही सवाल उठा कि क्या वाकई ये उत्तर प्रदेश है?
राजदरी-देवदरी क्यों हैं इतने मशहूर?
इन झरनों की सबसे बड़ी खासियत है उनकी प्राकृतिक भव्यता। राजदरी और देवदरी स्थानीय लोगों के लिए पसंदीदा पिकनिक स्पॉट हैं। वाराणसी, जौनपुर और आसपास के इलाकों से लोग यहां वीकेंड पर बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।
दुर्भाग्य से, ऐसे ऑफबीट टूरिस्ट स्पॉट्स पर मुख्यधारा मीडिया और ट्रैवल गाइड्स में बहुत कम जानकारी मिलती है। जबकि सच्चाई यह है कि चंदौली, सोनभद्र, मिर्ज़ापुर और गाज़ीपुर का इलाका भविष्य में एक बड़ा ईको-टूरिज़्म हब बन सकता है।
कहां स्थित हैं राजदरी-देवदरी झरने?
राजदरी और देवदरी झरने चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य के भीतर स्थित हैं। वाराणसी से इनकी दूरी मात्र 1–2 घंटे की है। विंध्य पर्वत श्रृंखला से घिरा यह इलाका प्राकृतिक सुंदरता का बेहतरीन उदाहरण है।
इतिहास से जुड़ा है ‘चंद्रकांता’ का रोमांच
बहुत कम लोग जानते हैं कि मशहूर धारावाहिक और उपन्यास ‘चंद्रकांता’ की कहानी इसी इलाके से प्रेरित थी। विजयगढ़ और नौगढ़ किले आज भी मौजूद हैं, जो इस प्रेम कथा और ऐय्यारी की दुनिया की याद दिलाते हैं। चंद्रकांता ईको-टूरिज़्म सर्किट आज भी यहां पर्यटकों को आकर्षित करता है।
राजदरी जलप्रपात: पहला नज़ारा, पहला झटका
राजदरी झरना देखने के लिए सुरक्षित व्यूइंग प्लेटफॉर्म बनाए गए हैं। सीढ़ियां उतरते ही सामने झागदार पानी चट्टानों पर फिसलता हुआ विशाल कुंड में गिरता दिखता है। यह दृश्य इतना प्रभावशाली है कि कुछ पल के लिए शब्द ही नहीं निकलते।
देवदरी जलप्रपात: शांत, विराट और कम जाना-पहचाना
राजदरी से सिर्फ 500–700 मीटर दूर स्थित देवदरी झरना और भी ज्यादा शांत और रहस्यमय लगता है। यहां बना मचान दूर से झरने और कैन्यन का शानदार दृश्य देता है। भीड़ कम होने के कारण यह जगह फोटोग्राफरों और प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं।
औरवाटांड़ कैन्यन: यूपी का सबसे बड़ा सीक्रेट
अगर राजदरी-देवदरी लोकप्रिय हैं, तो औरवाटांड़ बिल्कुल अनसुना। यहां पहुंचते ही ऐसा लगता है मानो आप मध्य प्रदेश या अमेरिका के किसी कैन्यन में आ गए हों। ऊंची चट्टानों से गिरता पानी, चारों तरफ फैली हरियाली और सन्नाटा—यह जगह अब भी पूरी तरह कच्ची और अनछुई है।
30 - 40 हज़ार साल पुरानी गुफा चित्रकला!
औरवाटांड़ में मौजूद प्रागैतिहासिक शैल चित्र इस जगह को और भी खास बना देते हैं। लाल रंग में बने शिकार, नृत्य और जीवन से जुड़े दृश्य हज़ारों साल पुराने हैं और आज भी साफ दिखते हैं। यह उत्तर प्रदेश के सबसे कम ज्ञात प्राचीन कला स्थलों में से एक है।
रहस्यमयी गुफाएं और लोककथाएं
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इन पहाड़ियों की गुफाओं का इस्तेमाल पुराने ज़माने में राजा-महाराजा और उनके गुप्तचर करते थे। सुरक्षा कारणों से ज़्यादातर गुफाएं अब बंद कर दी गई हैं।
चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य
यह उत्तर प्रदेश का सबसे पुराना वन्यजीव अभयारण्य है, जिसकी स्थापना 1957 में हुई थी। कभी यहां एशियाई शेर भी लाए गए थे। आज यहां हिरण, सांभर, तेंदुआ, लकड़बग्घा, नीलगाय और कई दुर्लभ पक्षी पाए जाते हैं।
नौगढ़ डैम और गांवों की सैर
औरवाटांड़ जाते समय पड़ने वाला नौगढ़ डैम भी रुकने लायक जगह है। इसके आसपास बसे आदिवासी गांव, मिट्टी के घर, शांत जीवनशैली और लोकसंस्कृति इस यात्रा को और खास बना देते हैं।
क्या यहां जाना सुरक्षित है?
झरनों के पास चट्टानें बेहद फिसलन भरी होती हैं। पानी में उतरना या नहाना खतरनाक हो सकता है। सुरक्षित दूरी से ही झरनों का आनंद लेना सबसे बेहतर है।
कब जाएं?
- मानसून (जून–अगस्त): सबसे बेहतरीन समय
- सर्दियां: पानी अच्छा रहता है, मौसम सुहावना
- गर्मी: बहुत ज्यादा गर्मी, कम अनुशंसित
कैसे पहुंचें?
- सड़क: वाराणसी से लगभग 70 किमी
- रेल: वाराणसी या पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन
- हवाई: वाराणसी एयरपोर्ट
निजी टैक्सी सबसे बेहतर विकल्प है।
निष्कर्ष
बिल्कुल। राजदरी-देवदरी और औरवाटांड़ झरने वाराणसी पर्यटन का सबसे अनदेखा लेकिन सबसे शानदार अध्याय हैं। ये जगहें शोर-शराबे से दूर, प्रकृति के बेहद करीब ले जाती हैं। अगर आप वीकेंड पर कुछ अलग, शांत और रोमांचक देखना चाहते हैं - तो ये झरने आपकी लिस्ट में जरूर होने चाहिए।

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