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वाराणसी: बाढ़ उतरी तो बेनकाब हुई वरुणा कारिडोर की धांधली, पाथवे के नीचे की कटान से बही मिट्टी

वरुणा किनारे कारिडोर निर्माण में हद दर्जे की धांधली हुई है। इसको लेकर बहुत पहले से ही आवाज उठती रही है। मामले की जांच सीबीआइ से कराने की मांग भी की गई थी लेकिन सरकार की ओर से मामले की अनसुनी कर दी गई। अब वरुणा कारिडोर का लोकार्पण हो चुका है। निर्माण कार्य पूर्णता के साथ ही ज्यों ही पहली ही बाढ़ उतरी तो धांधली बनेकाब हो गई।

वरुणा कारिडोर में बने पाथवे के नीचे की मिट्टी बाढ़ में कटान से बह गई। हालात बिगड़ता देख सिंचाई विभाग ने बाली की बोरियां व बांस-बल्ली से पाथवे को रोकने का प्रयास किया है। पाथवे के नीचे जहां मिट्टी की कटान हुई है। खास यह कि धांधली की वजह से कारिडोर के ध्वस्त होने की आशंका पहले से ही सिंचाई विभाग को थी। यही वजह है कि बड़ी चालाकी से विभाग ने पूरी परियोजना को उस वक्त जिला प्रशासन को हैंडओवर किया जब बाढ़ का पानी कारिडोर को अपनी आगोश में ले लिया था। मिट्टी की कटान को लेकर शुरू से ही आशंका जाहिर की जा रही थी तो कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग के अफसरों ने दावा किया था कि जीओ तकनीक से कारिडोर के किनारे घास लगाई गई है। इससे बाढ़ के दिनों में भी मिट्टी की कटान नहीं होगी लेकिन सारे दावे बेअसर साबित हुए।

मिट्टी के मद में खर्च हुए थे 21 करोड़

वरुणा नदी के दोनों किनारों पर पाथवे बनाने के लिए मिट्टी के मद में करीब 21 करोड़ खर्च होने की बात कही जा रही है। आपको आश्चर्य होगा यह जानकर कि वरुणा नदी के चैनलाइजेशन के लिए जिस 21 करोड़ रुपये मिट्टी के भुगतान का पेच फंस गया था। दरअसल, उसके लिए एक रुपये भी खर्च नहीं होने थे। वरुणा कारिडोर योजना में स्पष्ट प्रविधान था कि नदी की ड्रेजिंग से जो मिट्टी निकलेगी, उसका इस्तेमाल इसके चैनलाइजेशन के लिए दोनों किनारों को दुरुस्त करने में किया जाएगा। बावजूद इसके, खुलेआम इसकी अनदेखी की गई और जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे रहे। इन सबके पीछे बड़ी वजह रही तत्कालीन जिम्मेदारों की जैसे-तैसे काम कराकर बजट खपाने की जल्दबाजी थी।

पहले ही टूट गई थी रेलिंग

वरुणा कारिडोर परियोजना की शुरुआत 2016 में हुई थी। उस वक्त सपा सरकार थी। माडल के तौर पर शास्त्री घाट को विकसित किया गया था जबकि वर्ष 2017 में कार्य पूरा कर लेना था। खास यह कि इस अधूरे माडल कार्य में भी धांधली उजागर हुई थी। जो रेलिंग लगाई गई थी वह टूट गई थी। सपा सरकार में मंत्री रहे मनोज राय धूपचंडी ने आवाज उठाई तो रेलिंग बदली गई। पहले स्टील की लगाई गई थी जिसे बदलकर पत्थर का किया गया।

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