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गाजीपुर के अंधऊ समेत UP की 13 हवाई पट्टियों पर मिलेगा उड़ान का प्रशिक्षण, फ्लाइंग क्लब और एकेडमी कर सकेंगी उपयोग

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपने स्वामित्व की हवाई पट्टियों और अन्य परिसंपत्तियों में निजी संस्थाओं द्वारा उड्डयन क्षेत्र में प्रशिक्षण एवं अन्य गतिविधियां संचालित करने की अनुमति दे दी है। इसके लिए नीति भी निर्धारित कर दी है। कैबिनेट ने 16 अगस्त को ही इस नीति को हरी झंडी दे दी थी। योगी कैबिनेट ने 'उड्डयन के क्षेत्र में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए फ्लाइंग क्लब व अकादमियों को हवाई पट्टियों के उपयोग की नीति' को स्वीकृति प्रदान की थी।

नई नीति के तहत नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा चयनित फ्लाइंग क्लब एवं एकेडमी को अकबरपुर (अंबेडकरनगर), अंधऊ (गाजीपुर), श्रावस्ती, फर्रुखाबाद, धनीपुर (अलीगढ़), अमहट (सुल्तानपुर), म्योरपुर (सोनभद्र), सैफई (इटावा), पलिया (खीरी), झांसी, रसूलाबाद (कानपुर देहात), आजमगढ़ व चित्रकूट जिलों में स्थित कुल 13 हवाई पट्टियों तथा उन पर निर्मित परिसंपत्तियों (हैंगर, भवन आदि) में उड्डयन क्षेत्र के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने की अनुमति प्रदान कर दी है।

एक हवाई पट्टी पर अधिकतम चार फ्लाइंग क्लब या एकेडमी को ही उपयोग की अनुमति होगी। इसी प्रकार यदि चिह्नित हवाई पट्टी पर हैंगर उपलब्ध है तो अतिरिक्त शुल्क के भुगतान पर उपयोग की अनुमति मिलेगी। प्रशिक्षण सुविधाएं सृजित करने के लिए उपलब्धता के आधार पर अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना होगा। इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना के लिए न्यूनतम आवश्यक भूमि के उपयोग की अनुमति होगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम की आवश्यकतानुसार नाइट लैंडिंग के लिए सैफई हवाई पट्टी के उपयोग की अनुमति भी दे दी है। इसके लिए फ्लाइंग क्लब को अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना होगा। शुल्क का निर्धारण निदेशक नागरिक उड्डयन करेंगे।

प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अतिरिक्त हवाई पट्टियां राजकीय विमानों तथा चार्टर विमानों के लिए भी उपयोग में लाई जाएंगी। हवाई पट्टी के उपयोग की अनुमति 10 वर्षों के लिए अस्थाई तौर पर दी जाएगी और राज्य सरकार अपने विवेक पर छह माह के नोटिस पर किसी भी समय इस अनुमति को वापस लेने के लिए स्वतंत्र होगी।

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