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बुधवार की रात 10 बजे तक घाघरा नदी का कहर, कटान बढ़ने का खतरा, दहशत में पलायन कर रहे ग्रामीण

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घाघरा के तांडव को लेकर लगाए जा रहे कयास बुधवार को उस समय सच होते दिखाई दिए। जब घाघरा के गिरजा, शारदा व सरजू बैराजों का डिस्चार्ज सीजन के सबसे चरम को पार कर गया। 


जानकारों का अनुमान है कि गुरुवार की देर शाम तक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से सवा मीटर से भी ऊपर तक जा सकता है। जिससे बांसगांव के पास एल्गिन बांध को खतरा पैदा हो सकता है। हवा के साथ घाघरा नदी में उठा रही लहरें अब सीधे  स्परों व बांध से टकरा रही हैं। जिससे कटान का खतरा बढ़ गया है। पहले से ही बांसगांव के पास बांध घाघरा के निशाने पर है। फिर भी सिंचाई विभाग का दावा है की  बांध को कोई खतरा नहीं है। मौके पर कैंप कर कटान वाले हिस्सों को सही करने का काम चल रहा है। इधर नदी के रुख को देखकर बांध के आसपास बसे गांवों में दहशत व्याप्त हो गई है।

गांव वालों का कहना है कि हर बार सरकारी दावों के विपरीत नदी से बांध को सुरक्षित नहीं किया जा रहा है। जिससे बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। नकहारा, मांझा रायपुर, बांसगांव, नैपुरा व परसावल सहित बेहटा जैसे गांवो के लोग अपना जरूरी सामान लेकर पहले ही बांध पर शरण लिए हुए है। घाघरा घाट स्थित केंद्रीय जल आयोग संस्थान से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार बुधवार की रात 10 बजे तक घाघरा का जलस्तर 106 दशमलव 826 था जो खतरे के निशान से 75 सेंटीमीटर ऊपर था। लेकिन गिरजा, शारदा व सरजू बैराजों का कुल डिस्चार्ज चिंताजनक था।


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