Ghazipur News: अगर आप अपने गार्डन को रंग-बिरंगे फूलों से सजाना चाहते हैं और ज्यादा देखभाल का समय नहीं है, तो पॉपी फूल एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। गाजीपुर के पीजी कॉलेज परिसर में इन दिनों अलग-अलग रंगों के पॉपी फूल खिले हुए हैं, जो पूरे कैंपस की सुंदरता बढ़ा रहे हैं।
कॉलेज के माली शिववचन बताते हैं कि पॉपी का पौधा ज्यादा देखभाल नहीं मांगता। थोड़ी सी मिट्टी और सामान्य पानी में भी यह अच्छी तरह उग जाता है और खूबसूरत फूल देता है। उनके अनुसार बरसात के मौसम में इसके बीज जमीन पर गिर जाते हैं और ठंड शुरू होते ही पौधे अपने आप उगने लगते हैं। जनवरी के आसपास इसमें फूल आना शुरू हो जाते हैं और अप्रैल तक पूरा बगीचा रंगों से भर जाता है।
कैसा होता है पॉपी का फूल
पॉपी का पौधा वैज्ञानिक रूप से Papaver प्रजाति का माना जाता है। इसकी पंखुड़ियां बेहद पतली और मुलायम होती हैं, जो हल्की हवा चलने पर धीरे-धीरे हिलती रहती हैं। यह फूल लाल, नारंगी, गुलाबी और सफेद जैसे कई आकर्षक रंगों में दिखाई देता है। आमतौर पर इसकी ऊंचाई 30 से 90 सेंटीमीटर तक होती है।
खेती और उपयोग
पॉपी के पौधे को हल्की और अच्छी जलनिकास वाली मिट्टी पसंद होती है। इसके बीज बहुत छोटे होते हैं, जिन्हें सीधे मिट्टी में बो दिया जाता है। खास बात यह है कि एक बार बीज गिरने के बाद यह पौधा कई बार खुद ही उग आता है। कुछ किस्मों के पॉपी पौधों से पोस्ता (poppy seeds) भी मिलते हैं, जिनका इस्तेमाल खाने में मसाले के रूप में किया जाता है। हालांकि बगीचों में लगाए जाने वाले पॉपी पौधे ज्यादातर सजावटी होते हैं।
कैंपस की बढ़ी रौनक
पीजी कॉलेज के बगीचे में खिले पॉपी के फूल छात्रों और शिक्षकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। माली शिववचन बताते हैं कि जब जनवरी से अप्रैल तक ये फूल खिलते हैं, तो पूरा परिसर रंग-बिरंगा और बेहद खूबसूरत नजर आता है। कम देखभाल में खिलने वाला यह फूल न सिर्फ बगीचे की सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि प्रकृति के रंगों की सादगी का भी शानदार उदाहरण पेश करता है।
