Ghazipur News: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने आखिरकार उस विवाद पर स्पष्टता दे दी है, जिसने पिछले कुछ दिनों से चर्चा का माहौल बना रखा था। आयोग ने साफ कहा है कि गाजीपुर की डॉ. आकांक्षा सिंह ने ही सिविल सेवा परीक्षा में 301वीं रैंक हासिल की है।
सोमवार को जारी अपने बयान में यूपीएससी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के अभयपुर गांव की रहने वाली डॉ. आकांक्षा सिंह ने सिविल सेवा परीक्षा में 301वीं रैंक प्राप्त की है। उनका रोल नंबर 0856794 है। उनके पिता का नाम रंजीत सिंह और माता का नाम नीलम सिंह है।
दरअसल, यूपीएससी ने 6 मार्च को सिविल सर्विस परीक्षा-2025 का अंतिम परिणाम घोषित किया था। इसके बाद बिहार के आरा की आकांक्षा सिंह ने भी 301वीं रैंक मिलने का दावा किया था। वह रणवीर सेना के संस्थापक स्व. ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती और इंदुभूषण सिंह की पुत्री हैं।
जब मीडिया में उनके चयन की खबरें सामने आईं, तो गाजीपुर की डॉ. आकांक्षा सिंह ने भी 301वीं रैंक पर अपने चयन का दावा किया। उन्होंने अपने एडमिट कार्ड और रोल नंबर के साथ एक वीडियो जारी कर अपनी सफलता का प्रमाण दिया।
डॉ. आकांक्षा ने पटना एम्स से एमबीबीएस और एमएस की डिग्री हासिल की है और वह स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) हैं। उनके पिता रंजीत सिंह भारतीय वायुसेना में जूनियर वारंट ऑफिसर के पद पर तैनात हैं।
अपने दादा के निधन के बाद जब वह गांव पहुंचीं, तो उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू तीनों परीक्षाएं रोल नंबर 0856794 से दी थीं और इसी रोल नंबर पर उन्हें 301वीं रैंक मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि एडमिट कार्ड पर मौजूद बारकोड को स्कैन करने पर भी यही रोल नंबर सामने आता है।
डॉ. आकांक्षा को यह सफलता दूसरे प्रयास में मिली है।
वहीं दूसरी ओर, आरा की आकांक्षा सिंह का कहना है कि यूपीएससी में साक्षात्कार उन्हीं का हुआ था और 301वीं रैंक भी उन्हीं की है। उन्होंने मुख्य परीक्षा के लिए भरे गए फार्म की कॉपी भी पेश की है।
इस पूरे मामले ने दो अलग-अलग आकांक्षा सिंह के बीच रैंक को लेकर विवाद खड़ा कर दिया था। दोनों ही अपने-अपने चयन का दावा कर रही थीं, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई थी।
अब यूपीएससी के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि गाजीपुर की डॉ. आकांक्षा सिंह ने ही सिविल सेवा परीक्षा में 301वीं रैंक हासिल की है, और इसी के साथ कई दिनों से चल रहा यह विवाद लगभग खत्म हो गया है।
