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गाजीपुर में बालू की किल्लत से ठप पड़ने लगे निर्माण कार्य, मिस्त्री मजदूरों के समक्ष रोजी-रोटी की समस्या

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कोरोना संक्रमण काल से ही छायी मंदी के बीच अब बालू की किल्लत और महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। बालू की महंगाई का असर मकान निर्माण कार्य पर दिखने लगा है। कंस्ट्रक्शन का काम बंद होने से इससे जुड़े लोगों के समक्ष रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। 

बालू नहीं मिलने से इससे जुड़े अन्य सामान की बिक्री पर भी असर दिख रहा है। सीमेंट, गिट्टी व सरिया की बिक्री भी काफी कम हो गई है। ज्यादातर लोगों का घर आधा बनकर रुका हुआ है। इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि बिहार में लाल बालू का खनन बंद कर दिया गया है। नतीजतन एक साल पहले 1800 से 2,000 रुपये तक ट्राली मिलने वाला बालू फिलहाल छह से सात हजार रुपये तक बिक रहा है। मकान निर्माण कराने वाले लक्ष्मीकांत उपाध्याय, बबन यादव और करुणाकांत बताते हैं कि निर्माण काम काफी धीमी गति से चल रहा है। 

सेट्रिग कर मकान छोड़ दिया गया है। फिलहाल बालू का कीमत कम होने का इंतजार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि बालू खनन रुकने के साथ ही न सिर्फ किल्लत हुई है बल्कि बालू की कीमत में ढाई से तीन गुना बढ़ोतरी हुई है। फिलहाल पर्याप्त स्टाक नहीं होने के कारण कीमतें और भी बढ़ेंगी और निर्माण कार्य भी बिल्कुल प्रभावित होगा। 

बालू विक्रेताओं का कहना है कि एक साल पहले चौदह चक्का ट्रक पर लोड बालू 25-30 हजार रुपये तक आता था, जिसमें ग्यारह ट्राली बालू मिलता था, लेकिन अब पचास से साठ हजार रुपये ट्रक में सिर्फ चार फीट बालू मिलता है जिसमें मुश्किल से सात-आठ ट्राली ही बालू होता है। नतीजतन इसका असर व्यवसाई, मकान निर्माण कराने वाले और मिस्त्री मजदूरों पर भी पड़ा है।

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