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काशी में गंगा जल खतरा निशान के पार, गली- मोहल्‍लों में नाव बनी आवागमन का साधन

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काशी में गंगा का खतरे का निशान 71.262 है और गंगा का जलस्तर देर रात एक बजे तक 71.260 मीटर पर पहुंच गया। रात दो बजे तक जल स्तर 71.280 तक पहुंच गया और सुबह अनुमान लगाया गया कि पानी 71.350 तक पहुंचेगा, मगर नदी में बढ़ाव की गति कुछ ऐसी रही कि अनुमानों को धता बताते हुए गंगा का जलस्‍तर 71.38 मीटर तक सुबह आठ बजे जा पहुंचा। 

उधर, गाजीपुर और बलिया में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है, जबकि प्रयागराज और मीरजापुर में खतरे के निशान के करीब है। गंगा का बढ़ाव फाफमऊ से लगातार जारी होने से जल्‍द ही अन्‍य जगहों पर बाढ़ का पानी चुनौती देने लगेगा। रविवार रात आठ बजे फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 84.77 मीटर था। प्रयागराज में 84.03 मीटर व मीरजापुर में 77.25 मीटर जलस्तर था। गंगा की सहायक नदियां भी उफान पर हैं, जिससे उनके तटवर्ती इलाकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

वाराणसी में गंगा घाटों का संपर्क आपस में टूट गया है और वरुणा के तट पर बसे मुहल्लों में पानी प्रवेश कर गया है। बलिया-गाजीपुर मार्ग पर आवागमन ठप हो चुका है। चंदौली में बलुआ गंगा घाट पारकर पानी बाजार तक पहुंच गया है। चार अगस्त को कोटा बैराज धौलपुर से 22 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद चंबल नदी के जलस्तर में नौ मीटर तक वृद्धि हो गई है। इससे जुड़ी यमुना में छह मीटर बढ़ाव दर्ज किया गया है। अन्य नदियों का पानी भी प्रयागराज में गंगा में मिलने के बाद दो मीटर तक जलस्तर बढ़ा है।

वरुणा के तटीय गांवों में घुसा पानी : 

पिंडरा तहसील के वरुणा तटीय गांव कोइराजपुर, चमाव, भगतुपुर, दासेपुर, गोसाईपुर, करोमा सहित दर्जनों गांव में भी सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो गयी हैं। रविवार को दोपहर में एसडीएम ¨पडरा गिरीश द्विवेदी ने कोइराजपुर सहित अन्य गांवों का दौरा किया। एसडीएम ने काशी कृषक इंटर कालेज में बाढ़ राहत चौकी होने की जानकारी देते हुए प्रभावितों से वहां शरण लेने की अपील की। वरुणा किनारे रामेश्वर, लक्षिपुर, परसीपुर, रसूलपुर,जगापट्टी, नेवादा, औसानपुर, पांडेयपुर, खंडा,तेंदुई, सत्तनपुर के तटीय क्षेत्रों की फसलें डूब गई हैं। तहसीलदार राजातालाब मीनाक्षी पांडेय ने लेखपाल, व कानूनगो को बाढ़ चौकियों की स्थापना के बाबत स्थलीय तैयारी का आदेश दिया है। जंसा थानाध्यक्ष प्रेमनारायण विश्वकर्मा व रामेश्वर चौकी प्रभारी ने सावन के तीसरे सोमवार को भक्तों की भीड़ को देखते हुए रामेश्वर घाट पर बांस की बल्ली व रस्सा, ट्यूब की व्यवस्था कराई । क्षेत्रीय किसान रामजी तिवारी, छोटेलाल, नागेंद्र सिंह, राजेन्द्र सिंह, राजकुमार यादव, अवधेश यादव ने बाढ़ क्षेत्र में प्रभावित परिवारों की सुरक्षा व सहायता की मांग उठाई है।

डूबी जल पुलिस चौकी : दशाश्वमेध घाट स्थित जल पुलिस की चौकी जलमग्न हो गई है। मणिकर्णिका घाट पर शवदाह स्थल डूब गया है। नावों से शवों को ले जाकर घाट पर बने मंदिर की छत और हरिश्चंद्र घाट के सबसे ऊपरी सीढ़ी पर शवदाह हो रहा है। सामनेघाट व रमना में शवदाह स्थल डूब गया है।

टापू बने ढाब क्षेत्र के गांव : सिंहवार, सराय मोहाना, हनुमानपुर, चांदपुर गांव बाढ़ की चपेट में है। ढाब क्षेत्र के मोकलपुर, रामचंदीपुर, गोबरहां व आंशिक रामपुर, मुस्तफाबाद टापू बन गए हैं। इसके अलावा जाल्हूपुर, अम्बा, धराधर, मिश्रपूरा, सरसौल, जाल्हूपुर आदि ग्राम पंचायतों के निचले इलाकों में पानी घुस गया है।

गांवों में गोमती, नाद का पानी : नाद व गोमती नदी के बीच बसा पिपरी गांव पानी से घिर गया है। गांव की विद्युत आपूर्ति काट दी गई है। दो नावें चलाई जा रही हैं। वहीं, गोमती नदी का पानी धौरहरा पुरापर सड़क जलमग्न हो गया है। धौरहरा बाजार व भोगला मार्ग भी अवरूद्ध हो गया है। पानी घरों के पास पहुंच गया है। मार्कंडेय महादेव घाट व संगम की सीढ़ियों पर पानी चढ़ गया है। चंद्रावती, भंदहां, गौरा उपरवार आदि गांवों में फसल जलमग्न हो गई है।

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