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बनारस में गंगा बालू का रेट होगा आधा, लखनऊ की टीम सर्वे करके लौटी

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घर बनाने का सपना जल्द ही कई लोगों का पूरा होगा। उन्हें बाजार में गंगा बालू आधे रेट पर मिलेगा। उन्हें गंगा बालू लेने के लिए दूसरे जनपद और मंडी में मनमाना रेट नहीं देना होगा। बनारस में रामनगर से राजघाट तक सेंच्युरी क्षेत्र हटने पर शासन की सहमति पर जिला प्रशासन ने गंगा बालू का ठेका (पट्टा) करने का निर्णय लिया है। जिला प्रशासन के नेतृत्व में गठित टीम ने रामनगर से राजघाट तक गंगा घाट पर मौजूद बालू का सर्वे कर आंकलन करना शुरू कर दिया है। जिले के अन्य गंगा घाटों पर भी गंगा बालू का टेंडर किया जाएगा। लखनऊ की टीम ने सर्वे करके लौट गई है और जल्द अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। बनारस में करीब साढ़े तीन साल से बालू का ठेका नहीं हो रहा है। बीच में रमचंदी में बालू का ठेका हुआ था लेकिन विवाद के चलते निरस्त कर दिया गया।

रामनगर से राजघाट तक सेंच्युरी क्षेत्र होने के कारण पिछले दो दशक से यहां बालू का खनन नहीं हो रहा था। कई स्थानों पर बालू का टीला होने के चलते गंगा का पानी किनारे से निकलने के चलते घाट खराब हो रहे थे। इसको देखते हुए यूपी प्रोजेक्ट कारपोरेशन को गंगा के किनारे ड्रेजिंग करने का ठेका दिया गया है। ड्रेजिंग के दौरान निकले बालू का आंकलन लखनऊ की टीम करके लौट गई है। वहीं, अन्य स्थानों पर बचे बालू का आंकलन जिला प्रशासन की ओर से गठित टीम कर रही है।

तीन हजार में 100 फीट मिल रहा बालू

तीन साल पहले 100 फीट गंगा बालू 1200 से 1500 रुपये मिलता था। गंगा बालू का ठेका नहीं होने के चलते रेट दोगुना से अधिक हो गया। गंगा और मोंरग बालू में आधे का अंतर हो गया। फिर गंगा बालू का ठेका होने पर रेट कम हो जाएगा। इतना ही नहीं, सरकारी योजनाओं को पूरा करने में परेशानी होने लगी।

स्थानीय स्तर पर सर्वे चल रहा है

बालू का ठेका करने से पहले सर्वे करके आंकलन किया जा रहा है कि गंगा किनारे कितना घन फीट बालू मौजूद है। उसका अलग-अलग ब्लाक बनाया जा रहा है जिससे बालू ठेका करने में आसानी हो। लखनऊ की टीम सर्वे करके जा चुकी है। अब स्थानीय स्तर पर सर्वे चल रहा है। जल्द ही सर्वे का काम पूरा कर लिया जाएगा।

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