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यूपी पंचायत चुनाव ड्यूटी में अफसरों-कर्मचारियों पर कहर बन टूटा कोरोना, जाने कितनों को निगल गया

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यूपी पंचायत चुनाव 2021 को गोरखपुर के तमाम परिवार पूरी जिंदगी नहीं भूल पाएंगे। कोरोना संक्रमण के दौर इस ग्राम पंचायत चुनाव ने कई मासूम बच्चों सिर से असमय मां और पिता का हाथ छीन लिया तो कई परिवारों से बुढ़ापे की लाठी चली गई। दर्द की यह इंतहा थमती नहीं दिख रही है। मतगणना में ड्यूटी के बाद तमाम लोग खुद को क्वारंटीन कर लिए हैं। अपने शरीर के एक-एक बदलाव पर नजर गड़ाए हुए ताकि कोई भी तब्दीली दिखे तो कोरोना की जांच करा, समय से उपचार शुरू करा सकें।

रविवार और सोमवार को मतगणना के दौरान कई कर्मचारी संक्रमित मिले तो आनन-फानन में उन्हें बदल कर दूसरे कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई। ड्यूटी के बाद तमाम कर्मचारियों ने स्वयं को क्वारंटीन किया। बुखार, सर्दी जुकाम और बदन दर्द की शिकायतें सामने आईं। कई लोग कोरोना का नए सिरे से टेस्ट करा रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि आने वाले तीन चार दिनों में मतगणना में ड्यूटी देने वाले कर्मियों में काफी संख्या में संक्रमण सामने आएगा।

42 से अधिक शिक्षकों को निगल गया कोरोना

शिक्षक संगठनों के दावे को माने तो अकेले गोरखपुर जनपद में पंचायत चुनाव के दौरान 42 के करीब शिक्षामित्र, सहायक अध्यापक, प्रधानाध्यापक, लिपिक, लेखाकार का निधन हो चुका है। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रभाकर मिश्र एवं कार्यवाहक अध्यक्ष अमित कुमार मिश्र ने बताया कि पंचायत चुनाव में ड्यूटी के बाद अकेले 36 शिक्षकों की मौत हुई है। अभी तमाम शिक्षक कोरोना के संक्रमण से शिकार होकर जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस सूची में शिक्षा विभाग के लिपिक, लेखाकार और माध्यमिक शिक्षकों को भी जोड़ लिया जाए तो यह संख्या 42 पार हो जाती है। फिलहाल यूनियन ने मुख्यमंत्री एवं डीएम पत्र सौंप कर मृत शिक्षकों एवं कर्मचारियों के आश्रितों को 50 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति के साथ उन्हें अन्य सुविधाएं जल्द देने की अपील की है।

01 वनकर्मी की मौत, 15 संक्रमित

गोरखपुर वन प्रभाग में वनरक्षक खजनी कन्हैयालाल का चुनावी ड्यूटी के बाद हुए संक्रमण से निधन हो गया बल्कि 15 से ज्यादा वनकर्मी कोरोना के संक्रमण से गुजर रहे हैं। उत्तर प्रदेश सहायक वन कर्मचारी संघ के महामंत्री अमित श्रीवास्तव का कहना है कि कुल चार दिन में गोरखपुर समेत विभिन्न जिलों में डीएफओ समेत 8 वनकर्मियों की मौत कोरोना से हुई है। फ्रंटलाइन स्टाफ मानकर न वैक्सीन मिली न कोई सुविधा। सरकार तत्काल 50 लाख रुपये मृतक आश्रितों को प्रदान कर उन्हें नौकरी प्रदान करें।

 

14 से ज्यादा कर्मचारियों की मौत

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष रुपेश कुमार श्रीवास्तव एवं महामंत्री अश्वनी कुमार श्रीवास्तव कहते हैं कि लोक निर्माण विभाग, कृषि विभाग, ग्रामीण विकास, बिजली, जिला परिषद में तकरीबन 14 कर्मचारियों को पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान हुए संक्रमण से मौत हो गई। तमाम संक्रमित हैं। सरकार को चाहिए कि उन्हें कोरोना योद्धा घोषित करते हुए उनके मृतक आश्रितों को नौकरी एवं 50 लाख रुपये का आर्थिक अनुदान प्रदान करें।

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