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स्टेशन के बाहर हर रोज 30 हजार पैकेट भोजन वापस, ट्रेन में भूखे जा रहे मजदूर यात्री

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ये भी विडम्बना है। ट्रेन के भीतर एक बच्ची भूख से बिलख कर रोटी मांगती है और ट्रेन के बाहर 30 हजार पैकेट भोजन वापस चला जाता है। चारबाग स्टेशन पर ऐसा रोज होता है।

लखनऊ विकास प्राधिकरण को जिला प्रशासन ने केवल स्टेशन के बाहर ही भोजन वितरण  कराने का निर्देश दिया है। मगर वास्तविकता में भूखे तो वे यात्री हैं जो ट्रेन के भीतर हैं। मगर उनको भोजन कराने का नियम ही नहीं बनाया गया है। रोजाना सैकड़ों लोग ट्रेन के भीतर भूखे ही  रह जाते हैं वहीं दूसरी ओर गाड़ी के बाहर भोजन के पैकेट खाली वापस लौट जाते हैं ।

एलडीए पिछले करीब 10 दिन से चारबाग रेलवे स्टेशन पर आने वाले श्रमिक यात्रियों को भोजन करा रहा है । मगर जिला प्रशासन की ओर से एलडीए को केवल उन यात्रियों को भोजन कराने का निर्देश है जो अपनी यात्रा पूरी करके स्टेशन से बाहर निकलते हैं।  जबकि जो यात्री ट्रेन के भीतर हैं उनको भोजन कराने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है। इस वजह से आए दिन ऐसे प्रकरण सामने आ रहे हैं जिसमें गाड़ी के भीतर बैठे श्रमिक और उनके बच्चे भूखे ही यात्रा कर रहे हैं।

प्राधिकरण के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि दो दिन पहले करीब 35000 पैक भोजन का इंतजाम प्राधिकरण ने किया था। उस दिन केवल 5000 यात्री ही स्टेशन से बाहर निकले इस वजह से 30000 पैकेट भोजन को बस्तियों में बटवाना पड़ा दूसरी ओर लगातार इस तरह की रिपोर्ट सामने आ रही है । गाड़ी के भीतर बैठे यात्री भूखे यात्रा कर रहे हैं। इस पूरी अव्यवस्था में रेलवे व जिला प्रशासन के नियम आड़े आ रहे हैं। जिसमें स्टेशन के भीतर जिला प्रशासन की कार्यवाही को इजाजत नहीं दी गई है। एलडीए की संयुक्त सचिव ऋतु सुहास ने बताया हम लोग स्टेशन के अंदर जाकर भोजन वितरित नहीं कर सकते हैं । इस वजह से भोजन वापस हो रहा है । हमको स्पष्ट आदेश है कि स्टेशन के भीतर नहीं जाना है। 

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