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शनिवार को हत्यारोपितों को बचाने का आरोप लगा रही थी भीड़

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सैकड़ों की जमा हुई भीड़ शनिवार को यूं ही आक्रोशित नहीं थी। अब तक इनकी गिरफ्तारी न होना और इसके पहले भी कुछ एक मामलों में आरोपितों की दबंगई से उपजा यह आक्रोश था। यह अलग है कि इस मामले को कुछ लोगों ने हवा भी दिया था जैसा कि पुलिस का दावा है। बहरहाल, पुलिस वीडियो आदि से साक्ष्य जुटाकर मामले की पड़ताल कर रही है। कई थानों की फोर्स व पीएसी की तैनाती के बावजूद करीब तीन घंटे तक हलचल मची रही। इस दौरान दोनों तरफ वाहनों की कतार लगी रही। अब करीब 50 लोगों पर केस लादने की तैयारी है।

स्वजन शव को लेकर घर चले गए थे, लेकिन कुछ लोगों ने जाम के लिए न सिर्फ प्रेरित किया बल्कि इसमें संलिप्त हुए। निश्चित रूप से वह करीमुद्दीनपुर पुलिस से खार खाए हुए थे वरना समझाने के दौरान अचानक भीड़ हमलावर क्यों होती। उधर, रामधनी की हत्या के मामले में उनकी पत्नी गुदनी ने राजापुर के चार लोगों जयराम राजभर, हरेराम राजभर, आशू राजभर, अमित राजभर के अलावा दो अज्ञात के खिलाफ शुक्रवार को ही मुकदमा दर्ज कराया, लेकिन शनिवार तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि आरोपितों को पुलिस बचा रही है। पुलिस के सामने से यह सभी फरार हो गए। आरोप है कि इससे पहले भी इनमें से कुछ पर लूट का आरोप था, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। एसओ रामनेवास ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन डीएम-एसपी को मौके पर बुलाने की मांग पर ग्रामीण अड़े रहे।

प्रशासन की तरफ से मृतक के परिवार को परिवार लाभ योजना के तहत लाभ, रामधनी की बेटी मानसा की शादी का खर्च, आवास आदि आश्वासन के बाद सड़क जाम समाप्त हुआ। इस दौरान मृतक की पत्नी, पुत्री व पुत्र मयंक का रो-रो कर बुरा हाल था। घटनास्थल पर पुलिस के अलावा पीएसी के जवान भी थे। मुहम्मदाबाद एसडीएम राजेश गुप्ता, सीओ राजीव द्विवेदी, कासिमाबाद सीओ विजय आनंद शाही आदि थे।

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