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UP: 53 मिनट में उखड़ गईं कोरोना पॉजिटिव लड़की की सांसें, डॉक्टर हैरान

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कोरोना संक्रमित 26 वर्षीय युवती की अचानक मौत ने इलाज करने वाले डॉक्टरों तक को रुला दिया। भर्ती होने के साथ जब तक उसकी हिस्ट्री पूछते, उसकी पलकें हमेशा के लिए बंद हो गईं। डॉक्टरों को कुल 53 मिनट ही समय मिला।

कोरोना आईसीयू के नोडल अधिकारी प्रो. अनिल वर्मा के मुताबिक आलम यह है कि सुबह के राउंड में जिस मरीज से हाय-हेलो करके जाते हैं, शाम को राउंड में उनकी आंखें इशारा भी नहीं कर पातीं। इतनी जल्दी रोगी गंभीर हो रहे हैं कि दवाओं की सही डोज देने का मौका नहीं मिल रहा है। ऐसे में क्या किया जाए। इतनी जल्दी मौत कैसे हो रही, यह समझ में ही नहीं आ रहा है। सिर्फ एक-दो नहीं, बल्कि दर्जन भर ऐसे मरीज सामने रहे जो कोरोना की क्रूरता का शिकार हो गए। कोई सात घंटे जीवित रहा तो किसी का तीन घंटे में ही दम फूल गया।

वैसे मरीज देर से भी अस्पताल पहुंच रहे या तो होम आइसोलेशन में लापरवाही है या प्राइवेट इलाज के चक्कर में फंसे रहते हैं। बोले-अभी भी बाजारों में मास्क के बगैर लोग घूम रहे हैं। डॉक्टरों और इलाज की अपनी सीमा है उसे समझने की जरूरत है। युवती की मौत पर इलाज करने वाले एक डॉक्टर का कहना है कि वह रातभर सो नहीं पाए। इलाज प्लान कर रहे थे उसे बचाया जा सकता था या नहीं मगर कोशिश भी शुरू नहीं कर पाए। वहीं, देर रात हमीरपुर के मरीज की सांस स्ट्रेचर पर शिफ्ट के दौरान हो गई। उसे उर्सला से लाया गया था।

मौतें काफी परेशान करने वाली

हालात यह हो गए हैं कि इमरजेंसी होल्डिंग एरिया से कोविड अस्पताल रेफर करने का मौका नहीं मिल रहा है। आने वाले संक्रमितों की जान बचाने में हो रही है। डॉक्टर प्रो. यशवंत राव का कहना है कि एक राउंड में मरीज सामान्य रहते हैं दूसरे राउंड में वेंटीलेटर पर चले जाते हैं।

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