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दुबई जाने वाले ढाई लाख लोगों पर संकट, इन शर्तों ने बढ़ाईं दिक्कतें

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दुबई जाने वाले करीब 2.5 लाख लोगों को वहां की सख्ती ने मायूस कर दिया है। नियम इतने सख्त हैं कि तीन दिन से लगातार एयरलाइंस बुकिंग कर रही हैं उसके बाद उड़ान से ऐन पहले निरस्त कर दे रही हैं। लखनऊ समेत पूर्वी-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों से कामगार, इंजीनियर-मैनेजर खाड़ी देशों में नौकरी कर रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की सात अमीरातों में से एक दुबई पर्यटकों की भी पसंद है। लम्बे समय बाद दुबई ने यात्रियों के लिए अपने दरवाजे तो खोले हैं लेकिन शर्तें काफी सख्त रख दी हैं।

एक प्रमुख एयरलाइंस के अधिकारी ने बताया कि दुबई की कुछ शर्तें ऐसी हैं कि बुकिंग ही नहीं मिल रही। जैसे, यात्री को टीके की पूरी डोज लग चुकी हो लेकिन दुबई में ही लगा होना चाहिए। यदि वहां का टीका नहीं लगा है तो एयरपोर्ट पर क्यूआर कोड वाली मशीन से आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट होनी चाहिए। यह रिपोर्ट बोर्डिंग से चार घंटे पहले की होनी जरूरी है। यह दोनों शर्तें इसलिए भी पूरी नहीं हो सकतीं क्योंकि फिलहाल अमौसी स्थित एयरपोर्ट पर ऐसी कोई मशीन नहीं लगी है। ऐसे में इन शर्तों को पूरा करने वाले चार यात्री भी ढूंढना मुश्किल है। जिनकी नौकरी दुबई में है उनको तब तक सैलरी नहीं मिलेगी जब तक वापस नहीं जाएंगे। वापस जाने के लिए मुश्किलें खत्म होती नहीं दिख रहीं।

जिनके पास विशेष एप्रूवल उनको भी दिक्कत

लखनऊ के मूल निवासी एक प्रतिष्ठित व्यापारी का दुबई में बड़ा बिजिनेस है। अप्रैल से एक तरफ की उड़ानें बंद होने की वजह से अन्य लोगों की तरह वह भी फंसे हुए हैं। उन्होंने वहां सरकार से सम्पर्क किया तो बिना शर्त यात्रा का अनुमति पत्र ई मेल पर आ गया। बावजूद इसके नहीं जा पा रहे क्योंकि उड़ान ही नहीं हैं।

कम से कम 10 मशीनों की जरूरत

केरल के कोच्चि से शुरुआत हुई और देखते ही देखते देश के सभी बड़े हवाई अड्डों पर आरटीपीसीआर मशीन लग गई। लखनऊ में अभी इसकी तैयारी चल रही है लेकिन एक दिक्कत है। एक मशीन आधे घंटे में दो रिपोर्ट जारी करती है। ऐसे में एक उड़ान के लिए कम से कम 10 मशीनों की जरूरत पड़ेगी जो चार घंटों में कम से कम 160 यात्रियों के लिए रिपोर्ट दे।

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