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माइनर के निकलकर घनी बस्ती में पहुंचा मगरमच्छ, चंद्रप्रभा बांध में छोड़ा गया मगरमच्‍छ

चंद्रप्रभा नदी से निकलकर एक मगरमच्छ सोमवार को चकिया के बुढ़वल गांव स्थित माइनर में पहुंच जाने से ग्रामीणो में खलबली मच गई। ग्रामीणों ने सूचना पुलिस व वन विभाग दी। कर्मियों का काफी देर तक इंतजार के बाद ग्रामीणों ने साहस का परिचय देते हुए जाल व रस्सी लगाकर मगरमच्छ को कब्जे में लिया। राजपथ रेंज के बुढ़वल गांव के पूर्व प्रधान गुप्त नाथ के घर के समीप स्थित माइनर में सुबह विशालकाय मगरमच्छ को देख ग्रामीण हाल परेशान हो गए। देखते-देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई।

आशंका जताई जाती है कि समीपवर्ती चंद्रप्रभा नदी से निकलकर मगरमच्छ आहार की तलाश में घनी बस्ती स्थित लेफ्ट पथरहवा माइनर में पहुंच गया। घनी बस्ती के समीप माइनर में मगरमच्छ के पहुंचने से लोग किसी अनहोनी की आशंका से व्यथित हो गए। लोग बड़ी संख्या में लाठी डंडा लेकर पहुंच गए। लेकिन कोई हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। इस बाबत सूचना पुलिस और वन विभाग को दी गई। काफी इंतजार के बाद गांव के कुछ युवाओं ने साहस का परिचय देते हुए जाल व रस्सी लगाकर मगरमच्छ को पकड़ने में सफलता हासिल कर ली। उप वनक्षेत्राधिकारी आनंद दुबे के नेतृत्व ने टीम मौके पर पहुंची और टीम ने मगरमच्छ को विभागीय वाहन से चंद्रप्रभा बांध में सुरक्षित छोड़ दिया। मगरमच्‍छ को पकड़े जाने के बाद गांव वासियों ने राहत की सांस ली।

पूर्व में भी जिले के कई इलाकों में मगरमच्‍छ पकड़े जाने की घटनाएं सामने आई हैं। मगरमच्‍छ के पकड़े जाने के बाद उनको वापस चंद्रप्रभा बांध में छोड़ने की घटनाएं भी हुईं। लेकिन, उनके आबादी के क्षेत्र में आने की घटनाओं ने ग्रामीणों और प्रशासनिक अधिकारियों की दुश्‍वारियों ने सिर उठाया है। पूर्व में मगरमच्‍छ के हमले में लोगों की जान जा चुकी है। जबकि मगर के हमलों में लगातार इजाफा होने से पशुओं की क्षति और लोगों के जलस्रोतों पर मगरमच्‍छ के हमलों का शिकार होने की घटनाओं में कमी नहीं आ रही है। आबादी क्षेत्र के जल स्रोतों में कई मगरमच्‍छ अपना स्‍थाई अड्डा बना चुके हैं।   

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