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पहाड़ों पर भारी बारिश का पूर्वांचल तक पहुंचा असर, गंगा के जल स्‍तर में शुरू हुआ इजाफा

गंगा के जल स्तर में बढ़ोत्तरी जारी है। हालांकि, कभी एक सेंटीमीटर तो कभी दो सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से जल स्तर बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार मंगलवार की सुबह आठ बजे तक 63.58 मीटर मापा गया। सोमवार की शाम पांच से छह बजे तक गंगा के जल स्तर में बढ़ोत्तरी की रफ्तार एक सेंटीमीटर थी तो शाम छह से सात बजे तक जल स्तर में बढ़ोत्तरी की रफ्तार दो सेंटीमीटर प्रतिघंटा थी। सोमवार को जल स्तर सुबह 8 बजे 63.16 मीटर था।

गंगा में जल स्तर बढ़ने पर पलट प्रवाह होने से सर्वाधिक प्रभावित इलाका गंगा की सहायक नदी वरुणा के किनारे रहता है। पुराना पुल, सरैंया, पुलकोहना, शैलपुत्री, लक्खीघाट, ढेलवरिया, चौकाघाट, हुकुलगंज, वरुणा पुल आदि इलाके में पानी भर जाता है। इससे वरुणा नदी से जुड़े नाले भी ऊफान पर होते हैं। नरोखर नाला का पानी वरुणा नदी से करीब दो किलोमीटर दूर तक इलाके को प्रभावित कर देता है। सोनातालाब इलाके की गलियों व सड़कों पर नाला का पानी भर जाता है। गंगा किनारे पक्के महाल की कई गलियों में नावें चलने लगती हैं।  

एक ओर सरयू नदी में नेपाल की ओर से पानी छोड़े जाने के बाद से ही बलिया, मऊ और आजमगढ़ में दोबारा बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। सरयू के जलस्‍तर में इजाफा होने की वजह से पूर्वांचल में तटवर्ती इलाकों में चिंता बढ़ गई है। हालांकि, पानी छोड़े जाने के बाद जल का प्रवाह आगे बढ़ते ही पानी का स्‍तर सरयू में भी कम हो जाएगा। 

अब स्थिर होने की ओर गंगा : केंद्रीय जल आयोग की ओर से जारी अनुमानित जल बढ़ाव के आकलन पर गौर किया जाए तो अब गंगा के जल स्तर में बढ़ोत्तरी ठहर जाएगी। अनुमान के मुताबिक कानपुर में बैराज का पानी छोड़ने से हुआ है। हालांकि, इस बढ़ाव से बाढ़ के हालात नहीं बनेंगे। आगामी दो दिनों में जल स्तर स्थिर होने के साथ ही घटाव की ओर रुख कर लेगा।

वाराणसी में गंगा का जल स्तर

  • चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर
  • खतरा का निशान 71.262 मीटर
  • बाढ़ का उच्चतम बिंदु 73.901 मीटर

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