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गाजीपुर जिला अस्पताल में निजी एंबुलेंसों का कब्जा

जिला अस्पताल में निजी एंबुलेंसों का कब्जा है। स्थिति यह है कि ओपीडी से आपातकालीन परिसर तक इनकी लाइन लगी रहती है। चालक मरीजों एवं तीमारदारों को बहला-फुसलाकर अन्य जनपदों के निजी अस्पतालों में उपचार के लिए ले जाते हैं। इसे उन्हें खासा कमीशन मिल रहा है। उधर, अस्पताल में हालांकि पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस मौजूद है। लेकिन निजी एंबुलेंस चालक उनकी चलने नहीं दे रहे। शहर से ग्रामीण क्षेत्रों से रोजना सैकड़ों मरीज उपचार के लिए जिला अस्पताल आते हैं। 

ऐसे में जहां निजी एंबुलेंस चालक मरीजों और तीमारदारों को बेहतर इलाज के लिए निजी अस्पतालों में ले जाते हैं तो वहीं डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को भी कमीशन का लालच देकर वाराणसी रेफर कराते हैं। इस दौरान एंबुलेंस चालकों को अस्पताल संचालक अच्छा खासा कमीशन देते हैं। कुछ ऐसा ही मामला जिला महिला अस्पताल का भी है। यहां प्रसव के लिए आई महिला मरीजों के परिजनों को भ्रम में डालकर शहर में अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों में ले जाकर भर्ती कराया जा रहा है। पवन यादव ने बताया कि जब सरकारी एंबुलेंस पर्याप्त है तो ऐसे में निजी एंबुलेंस का जमवाड़ा अस्पताल परिसर में लगना समझ से परे हैं। 

अजय कुमार ने कहा कि निजी एंबुलेंस तक को लेकर कमीशन का खेल जारी है। प्रति मरीज 10 से 20 हजार रुपये कमीशन दिया जाता है। अखिलेश झा ने बताया कि शहर के मिश्र बाजार में जब जिला अस्पताल था तो वहां भी निजी एंबुलेंस का जमवाड़ा रहता था। अब जबकि गोराबाजार अस्पताल में यही स्थिति है। संतोष श्रीवास्त ने कहा कि निजी एंबुलेंस चालकों की अस्पताल में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों से मिली भगत है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि जल्द अभियान चलाकर निजी एंबुलेंस के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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