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गाजीपुर जनपद में आस लगाए बाढ़ पीड़ितों को प्रशासन से नहीं मिली कोई सहायता

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गाजीपुर जनपद में गंगा नदी के में जलस्तर वृद्धि की रफ्तार कम हुई है। अब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पानी बढ़ रहा है लेकिन तटवर्ती गांवों के लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। बाढ़ के पानी से घिरे लोग सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित कई गांवों में अभी नाव, राहत सामग्री की व्यवस्था नहीं की गई है।

गंगा का जलस्तर मंगलवार की सुबह दस बजे से बारह बजे तक 64.240 मीटर और दोपहर एक से तीन बजे तक 64.250 मीटर दर्ज किया गया। सुहवल में बाढ़ के पानी से घिरे गांवों के लोगों का कहना है कि पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए पर्याप्त नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। अभी तक राहत सामग्री नहीं मुहैया कराई गई है। पशुओं के लिए चारे का संकट भी गहरा गया है। जिनके घर पानी से घिर गए हैं वे खुले आसमान के नीचे या शरणालयों में समय काट रहे हैं। जबकि एसडीएम जमानिया प्रतिभा मिश्रा का कहना है कि राहत और बचाव का कार्य जारी है। गांवों तक नाव आदि की व्यवस्था कर दी गई है।

बारा में गंगा का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का पानी नाले के जरिए रौजा मुहल्ला होते हुए मुख्य पुरानी सड़क पर आ गया है। इससे गांव दो हिस्सों में बंट गया है। पानी बढ़ा तो स्थिति भयावह हो सकती है। बारा में कटान का सबसे अधिक प्रभाव भकना, मठिया, पहलवान घाट और कोट वाली घाट पर पड़ता है। मठिया घाट पर कटान के कारण अब तक आधा दर्जन से अधिक मंदिर और दर्जनों रिहाइशी घर गंगा में विलीन हो चुके हैं। बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए लोग सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। अब तक कोई अधिकारी गांव का हाल जानने नहीं पहुंचा है।

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