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वाराणसी: गंगा और वरुणा नदी का घटा जलस्‍तर, अब चर्म रोग ने लोगों की बढ़ाई परेशानी

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बाढ़ का पानी कम होने के बाद अब तटवर्ती लोगों को चर्म रोग ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है। कोविड-19 हास्पिटल के रूप में जिला अस्पताल के रिजर्व होने से मरीजों का सारा दबाव मंडलीय हास्पिटल पर है। स्किन ओपीडी में रोजाना चर्म रोग से ग्रसित 150 से 200 लोग पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम व डायरिया के भी मामले बढ़े हैं।

दरअसल, कोरोना काल में लोगों ने व्यक्तिगत स्वच्छता का कड़ाई से ध्यान रखा। कोविड नियमों का पूरा-पूरा पालन किया। वहीं बरसात व बाढ़ के चलते इसमें कुछ कोताही हुई। जगल-जगह जल-जमाव से जहां मच्छरों का प्रकोप बढ़ा, तो वहीं दूषित जल के चलते चर्म रोग व डायरिया जैसी बीमारियों ने पांव पसारे। मंडलीय हास्पिटल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डा. मुकुंद लाल श्रीवास्तव ने बताया कि बरसात से पहले जहां स्किन के मरीजों की संख्या लगभग न के बराबर थी, वहीं अब ओपीडी में पांव रखने की जगह नहीं मिल रही। रोजाना 150 से 200 मरीजों को परामर्श दिया जा रहा है।

वायरल फीवर के केस में भी उछाल 

मंडलीय हास्पिटल के फिजिशियन डा. एके श्रीवास्तव ने बताया कि इस मौसम में ज्यादातर मरीज वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम से ग्रसित होकर पहुंच रहे हैं। रोजाना करीब 200 मरीज आ रहे हैं, जिसमें से कुछ की हालत गंभीर होने पर भर्ती भी किया जा रहा है। प्रतिदिन डायरिया से ग्रसित 12 से 15 मरीज भी भर्ती किए जा रहे हैं।

बच्चे भी हो रहे बीमार

इस मौसम में स्वच्छता को लेकर कोताही बड़ों से अधिक बच्चों पर भारी पड़ रही है। मंडलीय हास्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. एसपी सिंह के मुताबिक ओपीडी में रोजाना 180 से 200 बच्चे पहुंच रहे हैं। ज्यादातर बुखार, खांसी-जुकाम व डायरिया से पीड़ित हैं।

जिला अस्पताल न चलने से बढ़ा दबाव

कोविड हास्पिटल के रूप में जिला अस्पताल को रिजर्व करने से शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पांडेयपुर व अर्दली बाजार के साथ ही मंडलीय अस्पताल पर मरीजों का दबाव बढ़ गया है। इसके चलते सुबह से दोपहर दो बजे तक न केवल पर्ची काउंटर पर, बल्कि ओपीडी सहित पैथालाजी केंद्र में भी लाइन में लगे रहना लोगों की मजबूरी बन गई है।

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