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चंदौली: जिले में नदियों के उफान से बाढ़ का बढ़ा खतरा

पिछले एक सप्ताह से गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी जारी है। वहीं अब कर्मनाशा नदी भी उफान पर दिखने लगी है। नदियों के तेजी से बढ़ते जलस्तर से तटतर्वी गांवों के किसानों में संभावित बाढ़ की चिंता सताने लगी हैं। ग्रामीण बाढ़ की डर से अभी सुरक्षित ठिकाने की तलाश में जुट गए हैं।

चहनियां प्रतिनिधि के अनुसार गंगा का जलस्तर रविवार की रात चार फीट और बढ़ गया। बलुआ घाट पर महिला चेंजिंग रूम आधे से अधिक डूब चुकी है। वहीं घाट की 16 सीढ़ियां को लांघ कर गंगा का वेग तेजी से आगे बढ़ रहा है। तटवर्ती गांव कांवर, महुअरिया, बिसूपुर, महुआरी खास, सराय, बलुआ , डेरवा, महुअरकला, हरधनजुड़ा, विजयी के पूरा, गणेश पूरा, सोनबरसा, महमदपुर, सरौली, टांडाकला, बड़गांवा, तीरगांवा, हसनपुर, नादी निधौरा आदि गांवों के ग्रामीणों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखने लगी हैं। ग्रामीणों को विषैले जीव जंतु का डर सताने लगा है।

पड़ाव प्रतिनिधि के अनुसार गंगा के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। घाटों का संपर्क टूटने लगा है। अवधूत भगवान राम समाधि स्थल घाट पर शवदाह स्थल भी बदल दिए गए हैं। गंगा में उफान के बाद सोमवार सुबह से ही जल पुलिस ने नौका संचालन अगले आदेश तक रोक दिया है। तटवर्ती गांव कुंडा, बहादुरपुर, सूजाबाद, चौरहट, मड़िया, रतनपुर, डोमरी, कटेसर, जलीलपुर आदि इलाकों में बाढ़ का पानी घरों में चला जाता है।

धीना प्रतिनिधि के अनुसार कर्मनाशा नदी में बांध का पानी छोड़े जाने से सोमवार को जलस्तर में बढ़ोतरी से तीन गांवो का संपर्क मार्ग डूबने के कगार पर आ गया है। नदी में जलस्तर बढ़ने से अरंगी से लोहरा, धनाइतपुर, लक्ष्मणपुर संपर्क मार्ग पर पानी आने से ग्रामीणों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों में बाढ़ की संभावना से दहशत व्याप्त है। बढ़ते जलस्तर से पशुओं का चारा व अरहर डूब गया है। ग्रामीण दिन भर सुरक्षित स्थान की तलाश में जुट गए हैं। वहीं संक्रामक बीमारियों का भी भय बना है।

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