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गाजीपुर: गंगा में नहीं मिला कोरोना, पर आक्सीजन की कमी

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गंगा के पानी में कोरोना वायरस का कोई अंश नहीं मिला है। जिले के बारा में गंगा के बीच से लिए गए सभी सैंपलों की आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव आई है। हालांकि, गंगाजल में हानिकारक बैक्टीरिया मिले हैं और पानी में आक्सीजन की कमी भी मिली है। राहत की बात यह है कि इसका जलीय जीवों पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान लखनऊ ने बीते माह दो फेज में गंगाजल का सैंपल लेकर जांच की थी। जिले की सीमा पर बारा और बिहार के चौसा के बीच से भी जल का सैंपल जांच के लिए लिया गया था। जांच के बाद इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी गई है।

गंगा का पानी नहाने व पीने योग्य नहीं

आइआइटीआर के सीनियर साइंटिस्ट खुद की निगरानी में पीपीई किट पहनकर गंगाजल की सैंपलिग में शामिल हुए। कुछ स्थानों पर नाव पर चढ़कर बीच धारा में सैंपल लिया गया।विज्ञानियों के रिसर्च में ई-कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी हर गंगाजल के सैंपल में पाया गया, जो इंसानों और जानवरों के पेट में हमेशा रहता है। इसके ज्यादातर रूप नुकसान नहीं पहुंचाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे हैं, जो पेट में ऐंठन और दस्त जैसे लक्षण पैदा करते हैं। कई बार इनकी वजह से किडनी काम करना बंद कर देती है और मरीज की मौत हो जाती है। हालांकि,विज्ञानियों ने यह स्पष्ट किया कि इस बैक्टीरिया से जलीय जीवों को कोई खतरा नजर नहीं आ रहा है, लेकिन मनुष्य के लिए यह नुकसानदेह हो सकता है। गंगाजल फिलहाल नहाने व पीने योग्य नहीं है।

रिपोर्ट से पहले दो फेज में लिया गया था सैंपल

गंगा में बहते शवों के बाद से गंगा नदी की स्वच्छता पर सवाल खड़े हो गए थे, जिसको लेकर नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा ने यूपी-बिहार के पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और आईआईटीआर लखनऊ को गंगाजल की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। पहले फेज में 24 मई से छह जून तक सैंपल लिए गए। दूसरे फेज की सैंपलिग 10 जून से 21 जून के बीच पूरी हुई। इसके बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार हुई। आइआइटीआर के प्रभारी निदेशक प्रो. एसके बारिक ने बताया कि गंगा नदी की आरटीपीसीआर तो निगेटिव रही, लेकिन कुछ फिजिको केमिकल पैरामीटर्स मानक से ज्यादा पाए गए हैं।

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