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गाजीपुर: 6 एंबुलेंस कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा, नए ड्राइवर और नए ईएमटी ने संभाली कमान

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अपनी मांगों को लेकर पिछले कई दिन से हड़ताल कर रहे एंबुलेंस कर्मियों पर जिला प्रशासन ने सख्ती करनी शुरू कर दी है। डीएम मंगला प्रसाद सिंह के निर्देश पर आधा दर्जन एंबुलेंस कर्मियों के विरुद्ध सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है। साथ ही अब एंबुलेंस पर दूसरे ड्राइवर और स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ को ईएमटी (इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन) के रूप में तैनात कर इस सेवा को बहाल कर दिया गया है।

एसीएमओ एवं नोडल डा. डीपी सिन्हा ने बताया कि 102 और 108 एंबुलेंस के सभी पुराने ड्राइवरों ने एंबुलेंस का चाबी हैंडओवर कर दिया है। इसके बाद सेवा प्रदाता जीवीके कंपनी ने नए ड्राइवरों की व्यवस्था कर स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने का काम किया है। उन्होंने बताया कि जनपद में 108 एंबुलेंस जिनकी संख्या 37 है इसमें से 35 रनिंग मोड में आ गए हैं। वही 102 एंबुलेंस जिनकी संख्या 42 है उसमें से 33 एंबुलेंस कार्यरत हो गई हैं। इसके साथ ही तीन एएलएस एंबुलेंस भी अब अपने काम में लग गई हैं। 

बताया कि एंबुलेंस में ईएमटी के रूप में पुरुष सीएचओ, एएनएम, मेल स्टाफ नर्स को लगाया गया है जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था अब पटरी आ गई है। कुछ पुराने एंबुलेंस ड्राइवर जो एंबुलेंस के चलाने में बाधा उत्पन्न कर रहे थे उनके खिलाफ आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम 1981 की धारा 3 और 4 के तहत कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है। इसमें राहुल गुप्ता, प्रमोद कुमार, उमेंद्र कुमार, विश्वजीत, रमेश गौर और मनोज यादव का नाम शामिल है।

स्वास्थ्य सुविधाएं सुधारने को सातवें दिन भी निकाली पदयात्रा : 

सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुधारने की मांग को लेकर पीसीसी सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के उपाध्यक्ष फरीद अहमद गाजी का शुक्रवार को सातवें दिन भी पदयात्रा के माध्यम से आंदोलन जारी रही। गहमर थाना से निकली पदयात्रा जीवनारायनपुर में समाप्त हुई। चेताया कि उनकी मांगें पूरी होने तक पदयात्रा आंदोलन जारी रहेगा। फरीद अहमद गाजी ने कहा कि वर्ष 2018 में भी सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुधारने के लिए पदयात्रा के माध्यम से आंदोलन छेड़ा था, लेकिन सरकार ने इस दिशा में कोई पहल नहीं की। सरकारी अस्पतालों की हालत बदतर हो चुकी है। सीएचसी पर चिकित्सकों और दवाओं का अभाव है तो पीएचसी के भवन जर्जर हालत में हैं। गरीब जनता को इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।

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