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मंगलवार को गाजीपुर जिले भर में रुक-रुककर जारी रहा बारिश का सिलसिला

जिले भर में मंगलवार को भी रुक-रुककर बारिश का होने का सिलसिला जारी रहा। इसके चलते सुबह से ही आम जनजीवन अस्त-व्यस्त बना रहा। बारिश होने और आसमान में बादलों के छाये रहने से पारा लुढ़ककर नीचे आ गया है, जिससे मंगलवार को अधिकतम तापमान जहां 28 डिग्री बना रहा, तो वहीं न्यूनतम तापमान 26 डिग्री दर्ज किया गया। 

वहीं सूर्य देव भी बादलों की ओट में छिपे रहे, जिससे तपिश कमी महसूस की गई। बारिश का सिलसिला कभी सुबह, तो कभी दोपहर, तो कभी शाम को जारी रहा। बारिश की वजह से शहर के कई हिस्सों में सड़क पर जलजमाव व कीचड़ का नजारा देखा गया। इससे आवाजाही में काफी दिक्कत उठानी पड़ी।

कृषि विज्ञान केंद्र पीजी कॉलेज से प्राप्त जानकारी के अनुसार अगले पांच दिनों के मौसम पूर्वानुमान आसमान में बादल छाए रहेंगे। वहीं भारी बारिश होने की संभावना भी जतायी गयी है। इस दरम्यान अधिकतम तापमान 28 से 29 डिग्री सेंटीग्रेड और न्यूनतम तापमान 24 से 25 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहने की संभावना है वहीं पश्चिमी व पूर्वी हवा औसत से 8 से 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बहने की उम्मीद जतायी गयी है। 

वहीं कृषि वैज्ञानिकों ने इस समय पशुओं के आहार में गेहूं का चोकर व ज्वार की मात्रा में वृद्धि कर देने और दुधारू पशुओं को संतुलित आहार देने के लिए पशुपालकों को सलाह दी है। बताया कि जो पशुपालक अपने पशुओं को कृमिनाशक औषधि नहीं दिए हैं, वह पशु चिकित्सक की सलाह से शीघ्र ही अपने पशुओं को कृमि नाशक दवा दे दें। कृषि विभाग के मौसम विदों ने आने वाले दिनों में भारी बारिश होने की भी संभावना जतायी है। धान की नर्सरी डालने वाले किसानों को कृषि विदों ने अवगत कराया है कि वह धान की नर्सरी के लिए खेतों में नमी को बनाए रखें। बारिश की संभावना को देखते हुए सिंचाई ना करें। 

इधर अरहर की बुवाई करने वाले किसान से खेतों को तैयार करने की सलाह दी गयी है। साथ ही बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें को कहा गया है, ताकि फसल अच्छी हो सके। कृषि विदों ने धान की नर्सरी तैयार करने के लिए इस मौसम को काफी अनुकूल मान रहे हैं। वहीं मानसून के दस्तक देने के बाद से हो रही रुक-रुककर बरसात से किसान वर्ग भी काफी खुश हैं। उनका कहना है कि इस मौसम का बेसब्री से इंतजार था। खास बात यह है कि समय से पहले ही मानसून आ गयी है। इससे किसानों में ज्यादा प्रसन्नता देखी जा रही है। जिले भर में इन दिनों जगह-जगह खेतों में धान की नर्सरी की तैयारी की जा रही है। 

मालूम हो कि लॉकडाउन के चलते किसान वर्ग को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। इस वजह से वह धान की खेती में ज्यादा जोर देकर इसकी भरपायी करना चाहते हैं। वैसे तो पूरे जिले में ही हर जगह धान की खेती होती है, लेकिन गंगा पार दक्षिणी क्षेत्रों में इसकी बड़े पैमाने पर खेती की जाती है, जिससे इन क्षेत्रों को धान का कटोरा भी कहा जाता है। इस बड़े पैमाने पर होने वाली धान की खेती को देखते हुए ही जमानियां में चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल को बनाया गया था, जिससे जमानियां, दिलदारनगर होते हुए सेवराई तहसील क्षेत्र के कई गांवों में सिंचाई का कार्य होता है। 

इधर पानी की कमी के कारण खेतों में सिंचाई कार्य नहीं हो पा रही थी, जिससे किसान समय से धान की नर्सरी तैयार करने को लेकर चिंतित होने लगे थे। मानसून के शुरू हो जाने से खेतों को पानी मिलने लगी है। इस पानी से ही धान की नर्सरी की तैयारी जोरों से शुरू हो गयी है। किसानों का मानना है कि बरसात होने का क्रम अगर ऐसे ही बना रहा, तो यह धान की खेती के लिए काफी बेहतर साबित होगा।

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