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बुजुर्ग की मौत पर मुस्लिम युवक बने मिसाल, खुद बनाई अर्थी, कंधा देकर कराया अंतिम संस्कार

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कोरोना संक्रमण के इस भयावह दौर में जहां मौकापरस्त, लोगों की मजबूरी का फायदा उठाने में लगे हैं तो वहीं मानवता की मिसाल पेश करने वाले भी कम नहीं हैं। कोई जरूतमंदों तक दवा, खाना और राशन पहुंचा रहा है तो कहीं कोई शाहिद, संतोष की अर्थी को कंधा देकर उसे मोक्ष की प्राप्ति करा रहा है। ऐसा ही कुछ मेरठ में हुआ, जहां एक हिंदू बुजुर्ग की मौत के बाद रिश्तेदार मेरठ नहीं पहुंच सके। परिवार में कोई नहीं था। इस विपदा की घड़ी में मोहल्ले के मुस्लिम लोगों ने खुद अपने हाथों से अर्थी बनाई और कंधा देकर श्मशान ले गए। इसके बाद हिंदू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार कराया।

पूर्वा फैयाज अली में संतोष नामक बुजुर्ग वर्षों से रहते थे। उनके परिवार में फिलहाल यहां कोई नहीं रहता। आसपास के लोग ही संतोष के लिए खाना और अन्य व्यवस्था करा देते थे। कभी बीमार हुए तो डॉक्टर को दिखा देते थे। सोमवार को बीमारी के कारण संतोष की मौत हो गई। कोई रिश्तेदार सूचना के बाद भी मेरठ नहीं पहुंच सका। ऐसे में अंतिम संस्कार और पार्थिव शरीर को कंधा देकर अंतिम संस्कार कराने का संकट हो गया।

ऐसे में समाजवादी पार्टी के शहर विधानसभा अध्यक्ष शाहिद पहलवान ने आसपास के अन्य युवकों को साथ लिया। अंतिम यात्रा के लिए अर्थी बनाई गई। शाहिद और अन्य युवकों ने संतोष की अर्थी को अपने कंधों पर सूरजकुंड श्मशान पहुंचाया। यहां शाहिद पहलवान ने ही संतोष का अंतिम संस्कार कराया। इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। अंतिम संस्कार में शहजाद कुरैशी, रिजवान कुरैशी, हाजी इकराम, शोएब, वाजिद, पप्पू, जफर रजा समेत कई लोग मौजूद रहे।

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