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कोरोना संक्रमण ने छीन ली बाबुल की चौखट, मंदिरों और रिश्तेदारों के घर से उठ रही बेटियों की डोलियां

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फेफना थाना क्षेत्र एक युवक की शादी 30 अप्रैल को थी। बरात हल्दी थाना क्षेत्र के गांव में जानी थी। शादी से दो-तीन दिन पहले ही बेटी वालों के पड़ोस में कोरोना से एक व्यक्ति की मौत हो गयी। डरे-सहमे बेटी वालों ने पहले तो शादी की तिथि आगे बढ़ाने पर विचार किया। ऐसा हुआ तो नहीं लेकिन यह तय हुआ कि अब बरात बेटी के बाबुल के घर नहीं बल्कि उसके ननिहाल में आएगी। यही हुआ। बिटिया की शादी का मंडप उसके मामा के घर बना और शादी की सभी रस्मों को पूरा करने के बाद बेटी की विदायी भी ननिहाल से ही कर दी गयी। 

इसी प्रकार शहर के एक मुहल्ले में परिवार के सदस्य व पड़ोसियों के कोरोना संक्रमित होने के बाद तय तिथि पर शादी मंदिर में करनी पड़ी। जबकि ऐसी ही एक अन्य शादी के लिए किराए पर लॉन का इंतजाम करना पड़ा। यह कुछ उदाहरण मात्र हैं। कोरोना की दूसरी लहर ने न सिर्फ शादी के सारे जश्न को फीका कर दिया है, बल्कि इस बीमारी ने बेटियों से उसके आंगन का मंडप व बाबुल की चौखट भी छीन ली है। भविष्य में हालात और खराब न हो जाएं, यह सोचकर लोग तिथि टालने की बजाय जैसे-तैसे शादी की औपचारिकता पूरी कर देना चाहते हैं। बेहद सादगी के साथ सारी रस्में पूरी कर बेटियों को विदा कर दिया जा रहा है।

कोरोना काल ने अरमानों पर फेरा पानी 
कोरोना के कहर ने जान-माल पर संकट तो खड़ा किया ही है, हमारी परम्पराओं पर भी गहरा आघात किया है। बेटियों की शादियों को लेकर मां-बाप तभी से सपने पालने लगते हैं, जब वह छोटी होती है। घर के जिस आंगन में बेटी पायल पहनकर रूनकते-झुनकते चलकर बड़ी होती है, उसी आंगन में उसकी शादी का मंडप बनता है और सभी रस्मों के बाद वह बाबुल के चौखट को पार कर पिया के घर जाती है। इस कोरोना काल ने इन सारे अरमानों पर भी पानी फेर दिया है।

न बैंड-बाजा और न ही बुला रहे दूर के रिश्तेदार 
कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरों के चलते शादी-विवाहों में अब सिर्फ रस्म अदायगी भर ही हो रही है। बैंड-बाजा, डीजे के अलावा जनवासा में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम धड़ाधड़ कैंसिल हो रहे हैं। सरकार ने भी बंद हॉल में 50 व खुले मैदान में 100 लोगों की अनुमति दी है, साथ ही लोग भी इसे लेकर कुछ हद तक जागरूक हुए हैं, लिहाजा बिना किसी धूम-धड़ाका के शादियां सम्पन्न हो रही हैं। बैंड-बाजा के साथ ही शादी वाले घरों में लोग दूर-दराज के रिश्तेदारों को भी बुलाने से परहेज कर रहे हैं। यही नहीं, दूसरे शहरों में रहने वाले घर-परिवार के सदस्य भी कम पहुंच पा रहे हैं।

दोस्तों को भी सिर्फ शादी की ही दे रहे सूचना 
शादियों में लोगों को बुलाने के लिए बड़े पैमाने पर निमंत्रण पत्रों का वितरण होता था। इस कोरोनाकाल में इस पर भी विराम लग गया है। लोग यार-दोस्त व रिश्तेदारों को सिर्फ शादी की सूचना मात्र ही दे रहे हैं। साथ ही फोन पर बातचीत में माहौल का हवाला देते हुए नहीं आने का निवेदन भी कर रहे हैं। खुद नाते-रिश्तेदार व दोस्त भी दूसरे शहरों से शादियों में आने से परहेज कर रहे हैं। 

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