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लखनऊ में कोरोना से बढ़ रहीं मौतें, नगर आयुक्त ने अंतिम संस्कार के लिए लिया यह फैसला

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कोरोना से हो रही मौतों ने सभी रिकाॅर्ड तोड़ दिए हैं। बैकुंठ धाम और गुलाला घाट पर विद्युत शवदाह गृहों पर मशीनों का दम फूलने लगा है। लगभग 65 शवों के पहुंचने से आठ से दस घंटे तक की वेटिंग चल रही है। लम्बी कतारों को देखते हुए दोनों घाटों पर लकड़ी से अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। कोरोना से बढ़ती मौतों और अंतिम संस्कार में आ रही दिक्कतों को देखते हुए नगर आयुक्त ने शहर में पांच विद्युत शव दाह की मशीनें और लगाने का फैसला किया है। इनका टेंडर शनिवार को निकाल दिया गया है। 15 दिनों बाद मशीनों को लगाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

नगर आयुक्त अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि पांच मशीनों को लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बैकुंठ धाम पर ज्यादा भार है। इसी लिए तीन मशीन बैकुंठ धाम में लगाई जाएगी। इसमें एक पुरानी मशनी को हटाकर नई लगाई जाएगी। साथ ही दो नई मशीनों की स्थापित होंगी। यहां पर कुल चार विद्युत शवदाह गृह हो जाएंगे। इसके अलावा गुलाला घाट पर एक मशीन और बढ़ाई जाएगी। एक नया विद्युत शवदाह गृह आलमबाग में स्थापित होगा।

लकड़ी से अंतिम संस्कार के बढ़े प्लेटफार्म

कोरोना संक्रमित शवों की संख्या बढ़ने से बैकुंठ धाम पर दस नए प्लेटफार्म और संचालित हो जाएंगे। यहां पर छह प्लेटफार्म कोरोना संक्रमित के लिए शनिवार को आरक्षित कर दिए थे। रविवार को चार और संचालित हो जाएंगे। उधर गुलाला घाट पर शनिवार को चार लकड़ी के प्लेटफार्म आरक्षित किए गए थे। यहां पर इसकी संख्या बढ़ाकर 10 की जाएगी है।

मौत का आंकड़ा बढ़ा

बैकुंठ धाम पर आम तौर पर लकड़ी से 20-22 शवों का अंतिम संस्कार होता था। लेकिन शनिवार को यहां पर लगभग 40 कोरोना संक्रमित और 45 सामान्य शवों का अंतिम संस्कार हुआ। अचानक इतनी संख्या में शवों के पहुंचने से स्थिति बहुत गंभीर हो गई। आशंका व्यक्त की गई कि सामान्य शवों में भी कई कोरोना संक्रमित हो सकती हैं। एम्बुलेंस और लाश गाड़ी की लम्बी कतार लग गई थी। रास्ता जाम हो गया था। बैकुंठ धाम पर शवों के रखने के लिए बने चबूतरों पर जगह नहीं थी। कई शव जमीन पर रखे गए थे। प्लेटफार्म पर जगह न मिलने से कई शवों का नदी के किनारे जमीन पर ही अंतिम संस्कार करना पड़ा। उधर गुलाला घाट पर भी लगभग 48 शव पहुंचे। इसमें 22 कोरोना संक्रमित थे। यही स्थिति शहर के अन्य श्मशान घाटों की रही। वीवीआईपी रोड आलमबाग, पिपरा घाट पर भी दिनभर अंतिम संस्कार होते रहे।

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