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विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र स्थित अक्षयवट हनुमान मंदिर में मौजूद विशाल वटवृक्ष गिरा

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श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन और पीएसपी कम्पनी की बड़ी लापरवाही से महंत परिवार में रोष है। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र स्थित अक्षयवट हनुमान मंदिर स्थित विशाल अक्षयवट वृक्ष विश्वनाथ मंदिर प्रशासन के लापरवाही से बुधवार को गिर गया। दरअसल, प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रॉजेक्ट विश्वनाथ धाम कॉरिडोर निर्माण कार्य के दौरान दायरे में आये अक्षयवट हनुमान और शिव सभा मन्दिर में आया है। मंदिर महंत परिवार से अनुमति लेकर विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने लिखित आश्वासन के साथ सुंदरीकरण का कार्य शुरू कर दिया गया था।

शुरू में ही महंत परिवार ने अधिकारियों को अवगत कराया था कि वृक्ष और अंजनी पुत्र के विशाल विग्रह को संरक्षित और सुरक्षित रखते हुए ही कार्य किया जाए। अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि सुरक्षित और संरक्षित किया जाएगा। पर निर्माण कर रही पीएसपी कम्पनी और मंदिर प्रशासन की लापरवाही से वृक्ष संरक्षित नहीं किया गया और बुधवार की सुबह विशाल अक्षयवट वृक्ष ढह गया। मंदिर महंत परिवार में इससे रोष व्याप्त है। महंत परिवार ने उक्त प्रकरण के संदर्भ में सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलकर मामले अपना विरोध जताने की बात कही है। वहीं, उक्त संदर्भ में राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी को फोन करके शिकायत करने का महंत परिवार ने प्रयास किया तो उनका फोन नहीं उठा। 

यह है मान्यता

अक्षयवट वृक्ष पूरे भारत वर्ष में तीन जगह पर विराजमान है। काशी, गया और प्रयाग। महंत बच्चा पाठक, नील कुमार मिश्रा और रमेश गिरी ने संयुक्त रूप से बताया कि गया में वृक्ष के नीचे पिंडदान करने का, प्रयागराज में सिर मुंडन कराने और काशी में इसी वृक्ष के नीचे डंडी स्वामी को भोजन कराने का महात्म्य है। तीनों स्थानों पर हनुमान जी तीन स्वरूप में विराजमान हैं। गया में बैठे हैं, प्रयागराज में लेटे हैं किले के अंदर और काशी में खड़े हनुमान जी हैं।

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