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भदौरा: विकास के इंतजार में जिले का अंतिम गांव कुतुबपुर

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गांवों के समग्र विकास की जितनी बात होती है उतना ध्यान नहीं दिया जाता है। आज भी ग्रामीण पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य, सिचाई, जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। विकास खंड भदौरा के कुतुबपुर समेत अधिकांश गांवों की ऐसी ही स्थिति है। पंचायत चुनाव नजदीक है, ऐसे में ग्रामीणों को गांव के विकास से काफी उम्मीदें हैं।

नदी के किनारे बसे गांव समृद्धि का प्रतीक होते हैं, लेकिन कर्मनाशा नदी के तट पर स्थित कुतुबपुर गांव को ले लीजिए। यहां के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कर्मनाशा बारिश के दिनों में मुश्किल खड़ी कर देती है। हर वर्ष किसानों की फसल बाढ़ से बर्बाद हो जाती है, जिससे किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ता है। सरकार की ओर से ग्राम पंचायत के लिए जारी बजट से ही काम कराए गए। अलग से प्रयास नहीं होने से अतिरिक्त विकास नहीं हो सका। इससे कई सपने अधूरे रह गए। गांव में स्वास्थ्य सुविधा, खेल मैदान, बारात घर की दरकार है।

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