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देव आराधना के साथ नए साल का स्‍वागत, वाराणसी में सुबह से ही सड़कें जाम

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नए साल का उल्लास देश-दुनिया में धूम-धड़ाके के साथ मनाया जाता है लेकिन देवाधिदेव महादेव की नगरी में आकर इसमें धर्म-अध्यात्म का रंग घुल जाता है। नव वर्ष में सूरज की पहली किरण उम्मीदों का उजाला लेकर आए, इस मनोकामना के साथ काशीवासी बाबा की देहरी पर शीश नवाए। अन्नपूर्णेश्वरी, संकट मोचन महाराज और काल भैरव मंदिर समेत आराध्य देवों के दरबार गए। संकटों से मुक्ति और सर्व मंगल की कामना का आशीष मांगे। पूजा पाठ से खाली होकर लोगों ने गंगा घाट का रुख कर किया। तब तक सूर्य देव भी पूरी अंगड़ाई के साथ जग चुके थे। युवाओं ने गंगा उस पार रेती पर मौज मस्ती की। तो वरुणा पार वासियों ने भगवान बुद्ध की तपोस्थली सारनाथ में नए वर्ष का उत्सव धूम धाम से मनाया।

नए साल के पहले दिन लगा भीषण जाम

हर साल की तरह नए साल के पहले दिन जाम में लोग फंसे   रहें। जिस दूरी को तय करने में 30 मिनट लगते थे वहीं शुक्रवार  की सुबह दूरी तय करने में एक घंटे का वक्त लगा। बनारस में नए साल के पहले दिन लोग परिवार के साथ दर्शन पूजन व घूमने के लिए निकले। साल के पहले दिन ट्रैफिक पुलिस के द्वारा कोई व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण सुबह होते ही शहर में हर तरफ जाम लग गया। देखते ही देखते जाम की झाम में धीरे-धीरे पूरा शहर ही समा गया। इस दौरान सड़क पर राहगीरों में धक्का-मुक्की होती रही। यही नहीं साल के पहले दिन शुक्रवार पड़ने के कारण लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा का दर्शन पूजन करने के लिए पहुंचे।

मंदिर प्रशासन की देखरेख में मंदिर परिसर की व्यवस्था अपने आप में अलग दिख रहा था, लेकिन मंदिर के बाहर सड़क पर वाहनों के पार्किंग किए जाने के कारण सड़क पर पैदल चलने के लिए जगह नहीं बचा था। इस बीच संकट मोचन पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों की लापरवाही के कारण पुलिस चौकी से लेकर लंका-दुर्गाकुंड मार्ग पर भीषण जाम लग गया। जाम की समस्या का इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि संकट मोचन पुलिस चौकी से दुर्गाकुंड की दूरी मोटरसाइकिल से तय करने में करीब डेढ़ घंटे का समय  लगा।  लोग सड़क के किनारे स्थित दीवारों पर चढ़कर किसी तरह जाम से निकलने का जुगात करने लगे रहें   ।

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