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अमेठी के गांव-गली में शुरू हो गई मोहल्ला पाठशाला, बागों में गूंज रही ए बी सी डी और क ख ग

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कापी, कलम, किताब से दूर हो चुके बच्चे एक बार फिर उनसे जुड़ रहे हैं। गांव में क, ख, ग व एबीसीडी की गूंज सुनाई देने लगी है। कहीं गलियों में किसी छत पर तो किसी बाग में मास्टर साहब बच्चों को ज्ञान दे रहे हैं। कोरोना से लड़ने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग फिर से कमर कस चुका है। यह सब संभव हुआ है गांव की मोहल्ला पाठशाला से।

कोरोना के चलते मार्च से ही बेसिक शिक्षा बेपटरी हो चुकी थी। बच्चों को शिक्षा से जुड़े रहने के लिए यह लर्निंग व अन्य माध्यमों के जरिए तमाम कोशिशें की जा रही हैं। लेकिन उनका बहुत सार्थक परिणाम नहीं निकल रहा है। नतीजा बच्चे किताब कापी से पूरी तरह से दूर होते जा रहे थे। इसको देखते हुए बीएसए ने एक अभिनव योजना शुरू की है। योजना के तहत गांव के किसी बाग में या किसी बड़ी छत पर या मोहल्ले के किसी सार्वजनिक स्थान में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पंजीकृत बच्चों को एकत्र कर उन्हें पढ़ाने के लिखाने का काम शुरू किया गया है। शुरू में कुछ शिक्षकों ने दिलचस्पी दिखाई और अभियान पूरे जिले में शुरू हो गया। अब इसके सार्थक परिणाम भी नजर आने लगे हैं।

तीन ब्लाकों में जोर शोर से चल रही पाठशाला

जिले के तीन ब्लाकों बाजार शुकुल, जगदीशपुर व सिंहपुर में लगभग हर गांव में मोहल्ला पाठशाला जोर शोर से चल रही है। यहां बच्चे रोजाना पढ़ने के लिए एकत्र हो रहे हैं। जगदीशपुर के देवकली सिंहपुर के खारा, पूरे मिसरन, सातन पुरवा, इन्हौना द्वितीय आदि गांव में मोहल्ला पाठशाला चलाई जा रही है।

गांव के लोग भी कर रहे सहयोग

मोहल्ला पाठशाला के संचालन में गांव के लोगों का भी सहयोग मिल रहा है। लोग बैठने के लिए टाट पट्टी की व्यवस्था तो कर ही रहे हैं। साथ ही जहां पाठशाला चल रही है वहां एक अच्छा वातावरण भी दे रहे हैं।

सकारात्मक है प्रयोग

मोहल्ला पाठशाला का कांसेप्ट बेहद अच्छा है। शिक्षकों को कोविड प्रोटोकाल का पूरा पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। बच्चे फिर से पुरानी लय में आ रहे हैं।
विनोद मिश्र,बीएसए अमेठी 

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