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Saturday, 10 October 2020

दीपावली का पर्व क्यों, कब और कैसे मनाई जाती है, इस दिन क्या करे...

दिवाली में महालक्ष्मी और गणेश जी पूजा का विधान है। दिवाली से पहले मनाये जाने वाले पर्व कुछ इस प्रकार है जैसे करवा चौथ, धनतेरस, नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली और फिर दिवाली का त्यौहार आता है। दिवाली के एक दिन बाद गोवर्धन पूजा किया जाता है और अगले दिन भाई दूज मनाई जाती है। हिन्दुओं का सबसे बड़ा दिवाली का त्यौहार पूरे विश्व में धूम धाम से मनाया जाता है। आइये बिस्तर से जानते हैं...

दिवाली के दिन शाम के समय भगवान श्री गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। दिवाली को दीपों का पर्व भी कहा जाता है। तो चलिए जानते हैं की दिवाली 2020 की तिथि, दिवाली की कथा के बारे में बिस्तर से।

दीपावली 2020 में 14 नवंबर को मनाई जाएगी। दिवाली का त्यौहार कार्तिक मास की अमावस्या को धूम धाम से मनाया जाता है। दीपावली पर माता लक्ष्मी, कुबेर जी और भगवान श्री गणेश की पूजा का विधान है।

  • दिवाली की तिथि: 14 नबंवर 2020
  • अमावस्या तिथि प्रारम्भ: 14 नबंवर 2020 दोपहर 2 बजकर 17 मिनट से
  • अमावस्या तिथि समाप्त: अगले दिन सुबह 10 बजकर 36 मिनट तक (15 नबंवर 2020)
  • लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 5 बजकर 28 मिनट से शाम 7 बजकर 24 मिनट तक (14 नबंवर 2020)
  • प्रदोष काल मुहूर्त: शाम 5 बजकर 28 मिनट से रात 8 बजकर 07 मिनट तक
  • वृषभ काल मुहूर्त: शाम 5 बजकर 28 मिनट से रात 7 बजकर 24 मिनट तक

दीपावली का इतिहास 

दिवाली शरद ऋतु में मनाया जाने वाला एक प्राचीन हिंदू त्यौहार है। दीपावली हिंदू कैलेंडर के कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला त्यौहार है। यह त्यौहार अंग्रेजी कैलेंडर (ग्रिगेरियन) के अनुसार अक्टूबर या नवंबर में प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है।

दीपावली हिंदुओं के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक दीपावली दीपों का त्योहार है। ऐसा माना या कहा जाता है कि अयोध्या के राजा राम के 14 वर्ष के वनवास पूरा अयोध्या लौटने की खुशी में या त्योहार मनाया जाता है। दीपावली में रंगीन पाउडर का प्रयोग कर रंगोली बनाना तथा उसे सजाना दीपावली का काफी प्रसिद्ध है। आध्यात्मिक रूप से (दीपावली) प्रकाश की अंधकार पर विजय प्राप्त करना है दीपावली को अन्य नाम दिवाली भी कहा जाता है।

मनाए जाने वाले के कारण

भारतवर्ष में सभी त्योहारों में से दीपावली का सामाजिक एवं आर्थिक दोनों दृष्टि से आध्यात्मिक महत्व है। दीपावली को दीपोत्सव अर्थात दीपों का त्योहार भी करते हैं।

दीपावली का त्यौहार आने से पूर्व लोग अपने घरों की साफ-सफाई अच्छे तरीके से करते हैं और बाजारों से खरीदारी भी करके बहुत से त्यौहार है योग सामान जैसे मिट्टी के दीए सजावटी वस्तुएं मोमबत्ती मिठाईयां इत्यादि लाते हैं और दीपावली के दिन दीया जलाकर और अपने अपने घरों में जाकर और पूजा अर्चना करके एक दूसरे को मिठाइयां भी बांटते हैं।

अयोध्या के राजा राम के अयोध्या लौटने से उनकी प्रजा अत्यंत प्रफुल्लित हो गई थी श्रीराम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दिए जलाएं।

अमावस्या की रात में पूरी अयोध्या दीपों से जगमगा उठी। तब से आज तक भारतीय प्रत्येक वर्ष यह प्रकाश- वर्ष हर्ष व उल्लास से मनाते हैं। तथा भारतीयों का विश्वास है कि सदा सत्य की जीत होती है और झूठ का विनाश होता है। दीपावली स्वच्छता और प्रकाश से सुसज्जित हो पर्व है।

दीपावली शब्द की उत्पत्ति:

दीपावली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के दो शब्दों 'दीप' अर्थात 'दिया' व 'आवली' अर्थात 'लाइन' या 'श्रृंखला' के मिश्रण से हुई है। इस उत्सव में घरों के द्वारा घरों की छतों व मंदिरों पर हजारों लाखों प्रकाश हों को प्रज्वलित किया जाता है।

दीपावली का महत्व

दीपावली भारत और नेपाल में सबसे सुपर छुट्टियों में से एक है। लोग दीपावली में अपने घरों को साफ कर उन्हें दीपावली के लिए सजाते हैं। नेपालियों के लिए त्यौहार इसलिए होता है क्योंकि इस दिन नेपाल शाम बदनावर से शुरू होता है।

दीपावली भारत में सबसे बड़े स्तन सीजन में से एक है। इस दौरान लोग कह रहे और सोने चांदी के गहने आदि हमारी वस्त्र तथा स्वयं और अपने परिवारों के लिए कपड़े उतार उपकरण रसोई के बर्तन आदि खरीदते हैं। दीपावली के दिन लोग अपने परिवार के सदस्य और दोस्तों को और स्वरूप हम तौर पर मिठाईयां और सूखे मेवे देते हैं बुराई पर अच्छाई की जीत का सबसे अच्छा व्यवहार में से एक है।

दीपावली पूजा की सरल विधि:

  • पूजा के दिन सबसे पहले एक छोटी आशा किया हुआ चौकी पर लाल या पीला रंग का कपड़ा बिछाकर से ऊपर लक्ष्मी गणेश जी की मूर्ति स्थापित करके रख दे।
  • लक्ष्मी जी के पास एक जल से भरा कलश जरूर रखें।
  • दो बड़े दीपक जरूर रखें जिसमें एक दीपक घी का तथा दूसरा दीपक तेल का हो।
  • साफ किए गए चौकी पर आटे से लोग बनाएं।
  • एक स्टील का कलश है उसमें दूध, दही, शहद, गंगाजल भरकर उस पर लाल कपड़ा बांधे और इस कलश के ऊपर नारियल रखें।
  • हाथ में अक्षत लेकर मां लक्ष्मी जी के मंत्र का उच्चारण करें फिर अगरबत्ती जला कर उनका आशीर्वाद ले।

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