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Sunday, 23 August 2020

नीतीश सरकार का बड़ा फैसला, अब बिहार निवासी ही बन सकेंगे राज्य के प्रारंभिक स्कूलों में शिक्षक


राज्य के करीब 72 हजार सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षक पद पर सिर्फ और सिर्फ बिहार के निवासी ही नियुक्त हो सकेंगे। इन प्रारंभिक स्कूलों में दूसरे राज्यों के शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति का रास्ता बंद हो गया है। शिक्षा विभाग ने यह प्रावधान लागू कर दिया है। शनिवार को विभाग की ओर से अधिसूचित बिहार राज्य नगर प्रारंभिक विद्यालय सेवा तथा बिहार राज्य पंचायत प्रारंभिक विद्यालय सेवा (नियुक्ति, प्रोन्नति, स्थानांतरण, अनुशासनिक कार्रवाई एवं सेवाशर्त) नियमावली, 2020 में इसका स्पष्ट प्रावधान कर दिया गया है कि बिहार में इन दोनों नियोजन नियमावलियों के तहत नियुक्ति में बिहार के निवासी ही आवेदन कर सकेंगे।

गौरतलब है कि वर्ष 2006 से राज्य में लागू माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षकों के नियोजन में यह व्यवस्था लागू है। इसके तहत बिहार के हाईस्कूलों और प्लसटू में केवल बिहार निवासी ही नियुक्त हो रहे हैं। आरंभ में प्रारंभिक शिक्षकों के नियोजन नियमावली में भी यही प्रावधान किया गया था, लेकिन वर्ष 2012 से लागू नियोजन नियमावली में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं होने से दूसरे राज्यों के खासकर बॉर्डर इलाकों में पड़ोसी राज्यों के भी कुछ शिक्षक नियुक्त हो गए हैं। अब जबकि नियोजित शिक्षक नियुक्त किये जाएंगे और उनकी तनख्वाह भी काफी अच्छी हो गई है, ऐसे में प्रारंभिक शिक्षकों की नियुक्त में शिक्षा विभाग ने करीब आठ वर्षों के अंतराल के बाद एक बार फर बिहारी अभ्यर्थियों तक ही 72 हजार प्रारंभिक स्कूलों में नियुक्ति का अवसर केन्द्रित कर दिया है।

शिक्षा विभाग द्वारा शनिवार को अधिसूचित दोनों नियुक्ति व सेवाशर्त नियमावली में ऐच्छिक स्थानांतरण समेत संशोधित सेवाशर्त के अन्य पहलू शिक्षकों के लिए पूर्व घोषित ही हैं, जिनपर हाल ही राज्य मंत्रिमंडल ने मुहर लगाई थी। बिहार राज्य नगर प्रारंभिक शिक्षकों तथा पंचायत शिक्षकों की नियुक्ति में पहले की तरह ही शिक्षक प्रशिक्षण और अन्य अनिवार्य डिग्रियां रखी गई है, शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण होना भी अनिवार्य ही है, लेकिन इसपर पहले से देय वेटेज समाप्त कर दिया गया है। पहले टीईटी में प्राप्तांक के मुताबिक मेधा सूची के निर्माण में अभ्यर्थियों के लिए कुछ अंक तय थे।

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