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पानीपत से बक्सर पहुंचे फैक्ट्री मालिक को मजदूरों ने लौटाया बैरंग: नून-रोटी खाएंगे पर वापस न जाएंगे

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लॉकडाउन के दौरान हजारों मील की दूरी तय कर जैसे-तैसे अपने गांव पहुंचे प्रवासी मजदूरों ने दोबारा बाहर जाने से इन्कार कर दिया। मामला बक्सर जिले के मठिला गांव का है। जहां 100 से अधिक प्रवासी मजदूरों को वापस लेने आए फैक्ट्री मालिक को साफ जवाब दे दिया।

सनद रहे कि देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए जब लॉकडाउन लगाया गया था, तब जो जहां थे, वहीं फंस गए। शुरुआती दौर में लोगों ने लॉकडाउन की स्थितियों को संभालने की सोची थी। लेकिन, जब लॉकडाउन का दायरा बढ़ा और मजदूरों के पास पैसे खत्म हो गए। तब वे बेचैन हो गए। इसी बीच फैक्ट्री मालिकों ने भी मदद करने की बजाए अपने हाथ खींच लिए। तब मजदूरों का धैर्य जवाब दे गया और वे रास्तों की कठिनाइयों की परवाह किए बगैर अपने-अपने गांव-घर के लिए निकल पड़े और जैसे-तैसे हजारों किमी दूरी तय कर अपने घर पहुंचने के बाद राहत की सांस ली।

धागा फैक्ट्री का मालिक आया था लेने
अब लॉकडाउन खुलने के बाद फैक्ट्री मालिकों को मजदूरों की अहमियत समझ में आई और वे मजदूरों को दोबारा काम पर लाने के लिए उनसे संपर्क करने लगे। इसी क्रम में हरियाणा के पानीपत से एक धागा फैक्ट्री के मालिक जिले के मठिला गांव आए और कामगारों को वापस चलने की बात कही। लेकिन, संकट के समय मदद से हाथ खींचने वाले फैक्ट्री मालिक को देखते ही कामगार मजदूर बिफर पड़े और दोबारा पानीपत जाने से साफ इनकार कर दिए।

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