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मीरजापुर : गांव में ही रहकर तरक्की की इबारत लिख रहे श्रमिक

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सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर अपने घरों को लौटे प्रवासी श्रमिकों का जोश और जज्बा कहीं से कम नजर नहीं आ रहा। हर कोई गांव में ही रहकर तरक्की की इबारत लिखने के सपने बुन रहा है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे श्रमिकों ने मनरेगा का हाथ थामा है तो कोई अपने बूते कुछ करने के लिए राह तलाश रहा है। श्रमिकों को लॉकडाउन के कारण भारी परेशानियों से जूझना जरूर पड़ा। मगर ये चुनौतियां इन मेहनतकशों की हिम्मत न डिगा सकी। वापस लौटे ये लोग फिर नए सिरे से अपने गांव में ही किस्मत आजमाने निकल पड़े हैं। मनरेगा में रोजगार तलाश रहे ये मजदूर भविष्य की नई गाथा लिखने को बेताब हैं।

जिले में अबतक लगभग दस हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक गैर प्रांतों से वापस अपने घर-गांव लौट आए हैं। वहीं निजी साधनों, पैदल और अन्य साधनों से भी प्रवासियों के आने का सिलसिला जारी है। जिले में लौटे ये श्रमिक 21 दिनों की क्वारंटीन होने के बाद जिले में ही काम की तलाश में हैं लेकिन इनके लिए सबसे सुखद स्थिति यह है कि अब गांव में ही मनरेगा के तहत इनको काम मिल रहा है। यही श्रमिक जो लॉकडाउन तक दूसरे प्रांतों का रूख कर रहे थे वे अब गांव में ही काम को धार देकर अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में लगे हैं। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक जनपद के सभी बारह ब्लाकों के 809 ग्राम पंचायतों में से 779 ग्राम पंचायतों में काम चल रहा है। 

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